जंगल से हरियाणा तक लकड़ी का काला कारोबार! रायगढ़ में इंटरस्टेट वन तस्करी सिंडिकेट का भंडाफोड़
खैर-तेंदू की अवैध कटाई, गढ़उमरिया में डंपिंग और दूसरे राज्यों में सप्लाई का कथित नेटवर्क बेनकाब — फर्जी टीपी की आड़ में खेल का आरोप, तीन गिरफ्तार; एक फरार
रायगढ़। जंगल की बेशकीमती खैर और तेंदू की लकड़ियां काटना, उन्हें गुपचुप तरीके से गोदाम तक पहुंचाना, वहां छिलाई-प्रोसेसिंग करना और फिर कथित तौर पर फर्जी ट्रांसपोर्ट परमिट की आड़ में दूसरे राज्यों तक पहुंचाना—रायगढ़ में वन विभाग और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई ने लकड़ी के इसी कथित काले कारोबार के एक बड़े अंतर्राज्यीय नेटवर्क को बेनकाब किया है।
मामला सामने आने के बाद यह सवाल भी खड़ा हो गया है कि आखिर जंगलों से निकलने वाली बेशकीमती लकड़ियों की अवैध सप्लाई चेन कितनी गहरी है और इस नेटवर्क में कितने लोग अब भी जांच के दायरे से बाहर हैं।
पुलिस-वन विभाग के मुताबिक कथित सिंडिकेट का नेटवर्क छत्तीसगढ़ के साथ ओडिशा और मध्यप्रदेश तक फैला था तथा लकड़ियों को हरियाणा, हिमाचल प्रदेश सहित अन्य राज्यों में अधिक कीमत पर खपाने की बात सामने आई है।
🔥 ग्रामीणों को लालच, जंगलों से कटाई और गढ़उमरिया में डंपिंग
प्रारंभिक जांच के अनुसार, धरमजयगढ़, घरघोड़ा और तमनार वन परिक्षेत्र के आसपास के क्षेत्रों में ग्रामीणों को पैसों का लालच देकर खैर एवं तेंदू की लकड़ियां कटवाए जाने की बात सामने आई है।
कटाई के बाद लकड़ियों को ट्रैक्टर, पिकअप और अन्य वाहनों के माध्यम से जामटीकरा, गढ़उमरिया स्थित एक गोदाम तक पहुंचाया जाता था। पुलिस के मुताबिक इसी गोदाम को कथित तौर पर अवैध लकड़ी के संग्रहण और आगे की सप्लाई के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था।
जांच में रोहित मित्तल द्वारा गोदाम किराये पर लिए जाने तथा मनीष अग्रवाल के साथ मिलकर लकड़ी के कारोबार को संचालित करने की बात सामने आई है।
🚨 5 मई 2025 की रेड ने खोली पूरे खेल की पहली परत
इस मामले की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी 5 मई 2025 की वन विभाग की कार्रवाई मानी जा रही है।
वन विभाग को सूचना मिली थी कि गढ़उमरिया स्थित गोदाम में आसपास के वन क्षेत्रों से लाई गई खैर और तेंदू की लकड़ियां अवैध रूप से जमा की गई हैं। इसके बाद टीम ने गोदाम में दबिश दी।
छापेमारी के दौरान ट्रक क्रमांक CG-15-DV-7577 में तेंदू प्रजाति के 42 नग लट्ठे, जिनकी मात्रा लगभग 1.731 घनमीटर बताई गई, बरामद हुए।
इसके अलावा गोदाम से—
– तेंदू एवं खैर के 146 नग लट्ठे
– लगभग 6.741 घनमीटर लकड़ी
– 9 चट्टा जलाऊ लकड़ी
– 1 कटर मशीन
– 1 वजन मशीन
– 2 कुल्हाड़ी
– 1 हथौड़ा
जब्त किया गया।
कुल मिलाकर रेड में बरामदगी ने वन विभाग की जांच को गंभीर बना दिया।
⚠️ फर्जी टीपी का खेल या दस्तावेजों की बड़ी गड़बड़ी?
छापेमारी के दौरान लकड़ियों के परिवहन को वैध साबित करने के लिए ट्रांसपोर्ट परमिट यानी टीपी प्रस्तुत किया गया था।
लेकिन जांच के दौरान संबंधित टीपी पर जारीकर्ता वन परिक्षेत्र अधिकारी के हस्ताक्षर नहीं पाए गए। प्रथम दृष्टया दस्तावेज संदिग्ध प्रतीत होने के बाद वन विभाग ने पूरे मामले की विस्तृत जांच शुरू की।
यहीं से मामला कथित अवैध लकड़ी भंडारण से आगे बढ़कर दस्तावेजों के इस्तेमाल और अंतर्राज्यीय तस्करी के नेटवर्क तक पहुंचा।
💰 जंगल की लकड़ी से दूसरे राज्यों में मुनाफे का खेल
पुलिस की प्रारंभिक विवेचना के अनुसार, आरोपियों द्वारा जंगलों से लकड़ी एकत्र कराने के बाद उसे गढ़उमरिया के गोदाम में जमा किया जाता था।
इसके बाद लकड़ियों की छिलाई आदि कर उन्हें परिवहन के माध्यम से दूसरे राज्यों में भेजे जाने की बात सामने आई है।
पुलिस का दावा है कि अवैध लकड़ियों को वैध दिखाने के लिए कथित तौर पर फर्जी टीपी का इस्तेमाल किया जाता था। दूसरे राज्यों में अधिक कीमत पर लकड़ी बेचकर मुनाफा कमाने की बात भी जांच में सामने आई है।
🚔 पुलिस की विशेष टीम ने कसा शिकंजा
वन विभाग की जांच के बाद 2 सितंबर 2026 को वन क्षेत्रपाल संजय लकड़ा के माध्यम से थाना जूटमिल में आवेदन दिया गया।
इसके आधार पर थाना जूटमिल में अपराध क्रमांक 490/2026 दर्ज किया गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी शशि मोहन सिंह के निर्देशन में सीएसपी मयंक मिश्रा के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की गई।
विशेष टीम ने आरोपियों की भूमिका की तस्दीक शुरू की और कथित नेटवर्क में उनकी भूमिका से संबंधित साक्ष्य जुटाए।
🚨 तीन आरोपी गिरफ्तार, ट्रांसपोर्टर फरार
जांच के बाद पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है—
1. रोहित मित्तल
पिता—सुभाष मित्तल, निवासी अग्रसेन कॉलोनी, विकास नगर, कोतरा रोड, रायगढ़।
2. मनीष अग्रवाल
पिता—राधेश्याम अग्रवाल, निवासी मुड़पार, बलौदाबाजार।
3. सलाउद्दीन खान
पिता—इलाउद्दीन खान, निवासी सरसींवा, जिला सारंगढ़-बिलाईगढ़।
वहीं भरत कुमार मेश्राम फरार बताया गया है और उसकी तलाश जारी है।
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार तीनों आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद उन्हें न्यायिक रिमांड पर भेजा जा रहा है।
⚖️ गंभीर धाराओं में अपराध दर्ज
पुलिस ने मामले में BNS की धाराओं 318(4), 336(3), 338, 340(2), 61(2), 3(5) एवं 111 तथा भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा 42 सहपठित धारा 41 एवं 52 के तहत कार्रवाई की है।
मामले की विवेचना अभी जारी है।
🔎 अब जांच के केंद्र में कई बड़े सवाल
इस कार्रवाई के बाद जांच एजेंसियों के सामने कई महत्वपूर्ण सवाल हैं—
क्या जंगलों से लकड़ी कटवाने के लिए बाकायदा स्थानीय स्तर पर नेटवर्क बनाया गया था?
कितने गांवों से लकड़ी एकत्र कर गढ़उमरिया पहुंचाई जाती थी?
कथित फर्जी टीपी किस स्तर पर तैयार होती थी?
दूसरे राज्यों में लकड़ी किन कारोबारियों को भेजी जाती थी?
कितने ट्रकों और वाहनों के जरिए अब तक लकड़ी बाहर भेजी गई?
क्या इस नेटवर्क में और ट्रांसपोर्टर, व्यापारी या बिचौलिए शामिल हैं?
और सबसे बड़ा सवाल—क्या 5 मई 2025 की जब्ती के बाद भी इस नेटवर्क ने अपना कारोबार जारी रखा था?
इन सवालों के जवाब पुलिस की आगे की विवेचना में सामने आने की उम्मीद है।
🌲 वन संपदा की सुरक्षा पर भी उठे सवाल
खैर और तेंदू जैसी वन संपदा की अवैध कटाई केवल लकड़ी की चोरी का मामला नहीं है, बल्कि इससे जंगलों और स्थानीय पारिस्थितिकी पर भी सीधा असर पड़ता है। ऐसे में पुलिस और वन विभाग की संयुक्त कार्रवाई को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
रायगढ़ में सामने आया यह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि जांच में स्थानीय स्तर पर लकड़ी संग्रहण से लेकर दूसरे राज्यों में कथित सप्लाई तक एक पूरी श्रृंखला के संकेत मिले हैं।
👮♂️ संयुक्त कार्रवाई में इनकी रही अहम भूमिका
संपूर्ण कार्रवाई एसएसपी शशि मोहन सिंह के निर्देशन तथा डीएफओ अरविंद पीएम, एसडीओ तन्मय कौशिक और एडिशनल एसपी अनिल कुमार सोनी के मार्गदर्शन में सीएसपी मयंक मिश्रा के नेतृत्व में की गई।
कार्रवाई में थाना जूटमिल प्रभारी निरीक्षक अभिनव कांत सिंह, थाना पुसौर प्रभारी हर्षवर्धन सिंह बैस, साइबर थाना प्रभारी निरीक्षक विजय चेलक, एएसआई राजेंद्र सिंह पटेल, मनमोहन बैरागी, प्रधान आरक्षक सतीश पाठक, लोमेश सिंह राजपूत, आरक्षक तरुण महिलाने और सुशील यादव की अहम भूमिका बताई गई है।
🔥 कार्रवाई के बाद भी कहानी खत्म नहीं—अब खुलेगा नेटवर्क का अगला राज
तीन गिरफ्तारियां और एक आरोपी का फरार होना इस मामले का फिलहाल पहला बड़ा पड़ाव है। पुलिस की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ेगी, यह साफ होगा कि कथित सिंडिकेट की जड़ें कितनी गहरी थीं, कितनी लकड़ी जंगल से बाहर निकाली गई और इस पूरे कारोबार में कौन-कौन लोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े थे।
रायगढ़ में वन तस्करी के खिलाफ हुई यह कार्रवाई अब सिर्फ चार आरोपियों तक सीमित नहीं दिख रही—जांच की अगली कड़ी कथित सप्लाई चेन, ट्रांसपोर्ट नेटवर्क, परमिट व्यवस्था और दूसरे राज्यों में लकड़ी के खरीदारों तक पहुंच सकती है।
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