बड़गांव में जमीन सौदे पर उठे गंभीर सवाल!
“वादे कुछ और, हकीकत कुछ और?”—बी.एस. कंपनी के खिलाफ किसानों ने कलेक्टर से लगाई गुहार
रायगढ़। तमनार तहसील बड़गांव के किसानों की शिकायत ने बी.एस. कंपनी द्वारा कृषि भूमि खरीदी के बाद किए गए कथित आश्वासनों को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। किसानों ने कलेक्टर रायगढ़ के समक्ष आवेदन सौंपकर पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच और भूमि क्रय के दौरान किए गए कथित वादों की पड़ताल की मांग की है।
किसानों का आरोप—भरोसा दिलाकर ली जमीन
शिकायत के अनुसार, भूमि क्रय के समय किसानों को कंपनी की ओर से रोजगार, खेती और कंपनी प्रबंधन तक पहुंच को लेकर कई आश्वासन दिए गए थे। किसानों का कहना है कि इन्हीं बातों पर भरोसा कर उन्होंने अपनी कृषि भूमि कंपनी को दी।
शिकायत में यह भी उल्लेख है कि किसानों को बताया गया था कि कंपनी का दरवाजा उनके लिए 24 घंटे खुला रहेगा और परिवार के सदस्यों को उनकी योग्यता के अनुसार रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा।
“औद्योगिक उपयोग तक खेती करने देंगे”—अब इसी पर सवाल
किसानों की शिकायत में सबसे महत्वपूर्ण दावा खरीदी गई जमीन पर खेती को लेकर है। किसानों के अनुसार उन्हें बताया गया था कि जब तक जमीन का औद्योगिक उपयोग नहीं किया जाता, तब तक वे करीब 10 से 12 वर्षों तक खेती कर सकेंगे।
अब किसानों का आरोप है कि जमीन कंपनी के नाम होने के बाद उन्हें कथित रूप से इस व्यवस्था का लाभ नहीं मिल रहा है।
रोजगार का वादा कितना पूरा हुआ?
किसानों ने प्रशासन से यह भी जांच कराने की मांग की है कि कंपनी द्वारा प्रभावित परिवारों के सदस्यों को उनकी योग्यता के अनुरूप कितने रोजगार दिए गए।
किसानों का कहना है कि यदि रोजगार का आश्वासन दिया गया था तो कंपनी के रिकॉर्ड से यह स्पष्ट होना चाहिए कि कितने प्रभावित परिवारों के सदस्यों को नौकरी मिली और कितने परिवार अभी भी रोजगार की प्रतीक्षा में हैं।
✨कंपनी प्रबंधन पर किसानों ने लगाए आरोप
आवेदन में किसानों ने कंपनी प्रबंधन से संपर्क करने के प्रयासों का भी उल्लेख किया है। किसानों ने आरोप लगाया है कि अपनी समस्याएं लेकर पहुंचने पर उन्हें उचित सुनवाई नहीं मिली।
यह आरोप शिकायतकर्ताओं के हैं और इनकी पुष्टि प्रशासनिक जांच के बाद ही हो सकेगी। संबंधित कंपनी/प्रबंधन का पक्ष सामने आने पर उसे भी समाचार में प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए।
✨कलेक्टर से मांगी गई जांच
किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि—
.भूमि क्रय के समय किए गए कथित आश्वासनों की जांच हो।
.प्रभावित किसानों के परिवारों को रोजगार देने संबंधी रिकॉर्ड की जांच हो।
.जिन जमीनों का औद्योगिक उपयोग नहीं हुआ, उनकी वर्तमान स्थिति जांची जाए।
.भूमि पर खेती से संबंधित किसानों के दावे की जांच की जाए।
.यदि किसी स्तर पर किसानों के साथ धोखाधड़ी या गलत आश्वासन की पुष्टि होती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
.किसानों और कंपनी प्रबंधन की प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में बैठक कराई जाए।
✨अब प्रशासन की जांच पर टिकी नजर
बड़गांव के किसानों द्वारा की गई शिकायत के बाद अब मामला जिला प्रशासन की जांच के दायरे में आने की मांग कर रहा है। यदि प्रशासन दस्तावेजों की जांच करता है तो भूमि बिक्री के दस्तावेज, कंपनी-किसान के बीच हुए पत्राचार, रोजगार रिकॉर्ड और भूमि के वास्तविक उपयोग से स्थिति काफी हद तक स्पष्ट हो सकती है।
किसानों की मांग साफ है—जमीन के बदले मिले आश्वासनों की जांच हो और यदि वादे किए गए थे तो उनके पालन की जवाबदेही भी तय हो।
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