जीवनदायिनी कुरकुट नदी की छाती छलनी, अवैध रेत माफिया बेलगाम
शासन –प्रशासन बना मुखदर्शक, सीसीटीवी के सामने धड़ल्ले से निकल रहे बालू लोड ट्रैक्टर
घरघोड़ा!नगर की जीवनरेखा कही जाने वाली कुरकुट नदी आज अवैध रेत उत्खनन के कारण कराह रही है। नदी की छाती को दिनदहाड़े छलनी किया जा रहा है और हैरानी की बात यह है कि यह सब कुछ प्रशासन की नाक के नीचे हो रहा है।
अवैध रेत माफिया इतने बेखौफ हो चुके हैं कि नगर के हृदय स्थल जय स्तम्भ चौक, जहाँ सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, वहीं से बालू से लोड ट्रैक्टर खुलेआम फर्राटा भरते नजर आ रहे हैं। न कोई रोक-टोक, न कोई कार्रवाई—मानो अवैध कारोबार को खुली छूट दे दी गई हो।
स्थानीय छेत्र वासियों का कहना है कि
“रात ही नहीं, दिन में भी रेत चोरी बेखौफ, धड़ल्ले से हो रही है। ट्रैक्टरों की आवाज़ से पूरा इलाका गूंजता है, लेकिन प्रशासन को कुछ दिखाई, सुनाई नहीं देता।”
पर्यावरण को भारी नुकसान
अवैध उत्खनन से न सिर्फ कुरकुट नदी का अस्तित्व खतरे में है, बल्कि
भूजल स्तर गिर रहा है
नदी का प्राकृतिक प्रवाह बाधित हो रहा है
भविष्य में जल संकट की आशंका बढ़ गई है!
प्रश्नों के घेरे में प्रशासन
क्या सीसीटीवी कैमरे सिर्फ दिखावे के लिए हैं?
क्या अवैध रेत माफिया को किसी का संरक्षण प्राप्त है?
आखिर कब होगी इन पर कार्रवाई?
छेत्र वासियों ने जिला प्रशासन और खनिज विभाग से तत्काल सख्त कार्रवाई की मांग की है। यदि समय रहते अवैध रेत उत्खनन पर रोक नहीं लगी, तो आने वाली पीढ़ियों को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।
अब सवाल यह नहीं कि अवैध रेत चोरी हो रही है, सवाल यह है—
प्रशासन आखिर कब जागेगा?
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