March 3, 2026

SP बदले, पर क्या बदलेगा घरघोड़ा?

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अवैध कारोबारियों की नींद उड़ेगी या फिर वही ‘सेटिंग’ का खेल?

रायगढ़!रायगढ़ जिले को नया पुलिस अधीक्षक मिल चुका है। शशिमोहन सिंह ने जिले की कमान संभाल ली है, लेकिन उनके स्वागत से ज़्यादा चर्चा घरघोड़ा थाना क्षेत्र की बदहाल कानून व्यवस्था को लेकर हो रही है। सवाल साफ है—क्या अब घरघोड़ा में अपराध पर लगाम लगेगी या फिर सब कुछ पहले जैसा ही चलता रहेगा?
घरघोड़ा वर्षों से अवैध कारोबार का हॉटस्पॉट बना हुआ है। डीजल चोरी, रेत तस्करी, कबाड़ का अवैध धंधा, जुआ-सट्टा—सब कुछ खुलेआम, और हैरानी की बात यह कि थाने से चंद कदमों की दूरी पर। इसके बावजूद कार्रवाई न के बराबर—जिससे पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

चोर बेखौफ, जनता परेशान—पुलिस मौन क्यों?
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि चोरी की घटनाएं आम हो चुकी हैं। वाहन खड़े करो तो डीजल सुरक्षित नहीं, दुकान बंद करो तो ताले की गारंटी नहीं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि—अपराधियों में पुलिस का डर खत्म क्यों हो चुका है?

थाने में वर्षों से जमे ‘खास’ चेहरे—संयोग या सिस्टम?
घरघोड़ा थाने में वर्षों से पदस्थ कुछ पुलिसकर्मियों को लेकर चर्चाएं आम हैं। कहा जाता है कि यही “स्थायी पोस्टिंग” अवैध कारोबारियों के लिए संरक्षण कवच बनी हुई है।
अब देखना यह होगा कि—
क्या नए SP इस जमी हुई व्यवस्था को तोड़ेंगे?
क्या वर्षों से एक ही जगह जमे पुलिसकर्मियों पर ट्रांसफर का हथौड़ा चलेगा?
या फिर ये चेहरे भी ‘अछूते’ ही बने रहेंगे?
कागजी कार्रवाई नहीं, कड़क एक्शन चाहिए
छेत्र की जनता अब मीटिंग, निरीक्षण और फोटोसेशन से ऊब चुकी है। उन्हें चाहिए—रेड, गिरफ्तारी और वास्तविक सज़ा।
नए SP के लिए यह सिर्फ एक थाना नहीं, बल्कि विश्वसनीयता की लड़ाई है।
अगर शशिमोहन सिंह वास्तव में अपराध के खिलाफ ज़ीरो टॉलरेंस की नीति पर चलते हैं, तो घरघोड़ा से इसकी शुरुआत अनिवार्य होगी।
वरना जनता यही मानेगी कि—
👉 SP बदले, सिस्टम नहीं।
अब सवाल पुलिस से है—क्या घरघोड़ा में कानून बोलेगा या अपराधी? 🔥