April 17, 2026

ऐतिहासिक धरोहरों की दुर्दशा पर फूटा आक्रोश, नगरवासियों ने सौंपा ज्ञापन

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बगमूड़ा व छोटे मुड़ा तालाब के संरक्षण और सौंदर्यीकरण की उठी मांग

घरघोड़ा। नगर की ऐतिहासिक जल धरोहर माने जाने वाले बगमूड़ा और छोटे मुड़ा तालाबों की लगातार बिगड़ती स्थिति को लेकर आखिरकार नगरवासियों का आक्रोश सामने आ गया। सोमवार को बड़ी संख्या में नागरिकों ने एकजुट होकर प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया और अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) तथा मुख्य नगर पालिका अधिकारी, नगर पंचायत घरघोड़ा को ज्ञापन सौंपकर तालाबों की तत्काल सफाई व सौंदर्यीकरण की मांग की।

ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि बगमूड़ा और छोटे मुड़ा तालाब केवल जलस्रोत भर नहीं हैं, बल्कि घरघोड़ा की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान के प्रतीक हैं। वर्षों से ये तालाब नगर के पर्यावरण संतुलन, भू-जल संरक्षण और सामाजिक गतिविधियों का केंद्र रहे हैं। वर्तमान में दोनों तालाब जलकुंभी, कचरे और गाद से पट चुके हैं। जलभराव और सड़ांध के कारण आसपास के क्षेत्रों में दुर्गंध फैल रही है, जिससे मच्छरों का प्रकोप बढ़ा है और संक्रामक बीमारियों की आशंका भी गहरा गई है।

नगरवासियों ने मांग की है कि—

तालाबों की व्यापक और स्थायी सफाई अभियान चलाया जाए

जलकुंभी व गाद हटाकर गहरी खुदाई कराई जाए

परिधि में प्रकाश व्यवस्था और सुरक्षा इंतजाम किए जाएं

हरियाली, बैठने की व्यवस्था व सौंदर्यीकरण कार्य किया जाए

संबंधित विभाग द्वारा शीघ्र स्थल निरीक्षण कर कार्ययोजना तैयार की जाए

“दिखावे की सफाई नहीं, चाहिए स्थायी समाधान”

नागरिकों का कहना है कि समय-समय पर जब भी आवाज उठाई जाती है, तब सीमित और औपचारिक सफाई कर मामले को शांत कर दिया जाता है। इसके बाद तालाब फिर उसी बदहाल स्थिति में पहुंच जाते हैं। नगर का सबसे पुराना और ऐतिहासिक तालाब वर्षों से उपेक्षा झेल रहा है, लेकिन अब तक कोई ठोस और दीर्घकालिक योजना सामने नहीं आई है।

लोगों ने सवाल उठाया कि इतना महत्वपूर्ण जलस्रोत होने के बावजूद जिम्मेदार विभागों की गंभीरता क्यों नजर नहीं आती? क्या केवल कागजी योजनाओं से ही जल संरक्षण संभव है?

जनप्रतिनिधियों की चुप्पी भी चर्चा में

विडंबना यह है कि क्षेत्र से जुड़े कई वरिष्ठ नेता और जनप्रतिनिधि सत्ता पक्ष में महत्वपूर्ण पदों पर हैं, फिर भी तालाबों की दुर्दशा पर उनकी सक्रिय पहल दिखाई नहीं दे रही। मंचों से विकास और संरक्षण के दावे जरूर किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हालात इन दावों की पोल खोलते नजर आते हैं।

जनहित में त्वरित कार्रवाई की अपेक्षा

नगरवासियों ने प्रशासन से आग्रह किया है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए शीघ्र कार्ययोजना बनाकर अमल में लाया जाए, ताकि ऐतिहासिक जल धरोहरों को पुनर्जीवित किया जा सके। नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाली पीढ़ियां इन तालाबों को केवल इतिहास की किताबों में ही पढ़ेंगी।

अब देखना यह है कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि इस जनआवाज पर कितनी तत्परता से प्रतिक्रिया देते हैं।