June 11, 2026

मुआवजा विवाद पहुंचा सत्ता के शीर्ष तक, वित्त मंत्री के बाद राजस्व मंत्री और विधानसभा अध्यक्ष तक पहुंची किसानों की आवाज

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“2007 की दरों पर 2026 में न्याय संभव नहीं” — विस्थापन के खतरे के बीच भू-प्रभावित ग्रामीणों की बड़ी लड़ाई

📍 घरघोड़ा/रायगढ़।

धरमजयगढ़ क्षेत्र के ग्राम कुर्मीभौंना, पोरडा और पोरडी के भू-प्रभावित ग्रामीण अब मुआवजा और पुनर्वास नीति में बदलाव को लेकर लगातार मुखर होते जा रहे हैं। पहले वित्त मंत्री तक अपनी बात पहुंचाने के बाद अब ग्रामीणों ने छत्तीसगढ़ के राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा को विस्तृत ज्ञापन सौंपकर भू-अर्जन नीति में संशोधन की मांग उठाई है।

ग्रामीणों का कहना है कि कोल माइंस परियोजना के लिए अधिग्रहित की जा रही जमीन का मुआवजा आज भी वर्ष 2007 में तय न्यूनतम दरों के आधार पर दिया जा रहा है, जबकि वर्तमान बाजार मूल्य कई गुना बढ़ चुका है। प्रभावितों के अनुसार वर्तमान नीति में असिंचित भूमि के लिए ₹6 लाख, अर्धसिंचित भूमि के लिए ₹8 लाख तथा सिंचित भूमि के लिए ₹10 लाख प्रति एकड़ मुआवजा तय है, जबकि वास्तविक बाजार मूल्य ₹20 से ₹25 लाख प्रति एकड़ या उससे अधिक पहुंच चुका है।

⚠️ “19 साल पुरानी दरों से पुनर्वास कैसे संभव?”

ज्ञापन में ग्रामीणों ने कहा कि वर्ष 2007 की दरों को वर्ष 2026 में लागू करना प्रभावित परिवारों के साथ अन्याय है। उनका कहना है कि बीते 19 वर्षों में जमीन की कीमत, महंगाई और जीवनयापन की लागत में भारी वृद्धि हुई है, लेकिन पुनर्वास नीति में उसी अनुपात में संशोधन नहीं किया गया।

ग्रामीणों ने आशंका जताई कि अधिग्रहण के बाद वैकल्पिक जमीन खरीदना और नई आजीविका स्थापित करना उनके लिए बेहद कठिन हो जाएगा। उन्होंने मांग की कि मुआवजा निर्धारण वर्तमान बाजार मूल्य, पंजीकृत विक्रय पत्र, गाइडलाइन रेट और महंगाई सूचकांक के आधार पर किया जाए।

📞 राजस्व मंत्री ने कलेक्टर से की सीधी चर्चा

सूत्रों के अनुसार, ज्ञापन मिलने के बाद राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने संबंधित जिले के कलेक्टर से फोन पर चर्चा कर पूरे मामले की जानकारी ली। इस दौरान कलेक्टर ने मंत्री को बताया कि वर्तमान मुआवजा दरों में बदलाव का अधिकार राज्य सरकार स्तर पर ही संभव है।

बताया जा रहा है कि इस पर मंत्री ने कहा कि यह विषय आगामी कैबिनेट बैठक में प्रमुख मुद्दों में शामिल रह सकता है। मंत्री की इस प्रतिक्रिया के बाद प्रभावित ग्रामीणों में नई उम्मीद जगी है।

🏛️ विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह से भी मिले ग्रामीण

इधर भू-प्रभावित ग्रामीणों ने छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह से भी मुलाकात कर अपनी समस्या रखी। ग्रामीणों ने बताया कि 2007 में तय मुआवजा दरों को वर्ष 2026 में लागू किया जा रहा है, जिससे सैकड़ों परिवारों के सामने गंभीर पुनर्वास संकट खड़ा हो गया है।

सूत्रों के मुताबिक, 19 साल पुरानी दरों पर मुआवजा दिए जाने की बात सुनते ही विधानसभा अध्यक्ष ने मामले को गंभीरता से लिया और तत्काल मुख्यमंत्री के नाम रीमार्क कर संबंधित आवेदन अग्रेषित किया।

📄 ग्रामीणों की प्रमुख मांगें

✅ ₹6, ₹8 और ₹10 लाख प्रति एकड़ की न्यूनतम दरों का तत्काल पुनरीक्षण
✅ वर्तमान बाजार मूल्य के अनुसार नया मुआवजा निर्धारण
✅ भू-अर्जन में पेड़-पौधों का पृथक मूल्यांकन जारी रखा जाए
✅ मुआवजा दरों की समय-समय पर स्वचालित समीक्षा व्यवस्था लागू हो

📌 तीन गांवों के सैकड़ों परिवार प्रभावित

ज्ञापन के अनुसार कुर्मीभौंना, पोरडा और पोरडी गांवों के सैकड़ों परिवार परियोजना से प्रभावित हैं। कई क्षेत्रों में 100 प्रतिशत भू-अधिग्रहण की स्थिति बनने की बात भी सामने आई है।

लगातार मंत्रियों और अब विधानसभा अध्यक्ष तक पहुंचा यह मामला साफ संकेत दे रहा है कि भू-प्रभावित ग्रामीण अब मुआवजा और पुनर्वास नीति में बदलाव की मांग को लेकर पीछे हटने वाले नहीं हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा प्रदेश स्तर पर बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक विषय बन सकता है।