सरस्वती साइकिल योजना पर बवाल! घटिया गुणवत्ता और बिना बिल-वारंटी साइकिल वितरण के आरोप, रवि भगत ने दी आंदोलन की चेतावनी
छात्राओं के हितों से खिलवाड़? साइकिल वितरण में पारदर्शिता पर उठे गंभीर सवाल, गुणवत्ता जांच की मांग तेज
लैलूंगा। छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी सरस्वती साइकिल योजना एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। छात्राओं को वितरित की जा रही साइकिलों की गुणवत्ता, पारदर्शिता और आवश्यक दस्तावेजों की अनुपलब्धता को लेकर जनप्रतिनिधि एवं समाजसेवी रवि भगत ने मोर्चा खोल दिया है।
रवि भगत ने विकासखंड शिक्षा अधिकारी, लैलूंगा को ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि योजना के तहत वितरित की जाने वाली प्रत्येक साइकिल की गुणवत्ता की स्वतंत्र जांच कराई जाए तथा छात्राओं को साइकिल के साथ बिल, वारंटी कार्ड और खरीद से संबंधित सभी आवश्यक दस्तावेज अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराए जाएं।
उन्होंने आरोप लगाया कि विगत वर्षों में वितरित कई साइकिलें निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतरीं, जिसके कारण छात्राओं को बार-बार खराबी, मरम्मत और अतिरिक्त खर्च जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा। उनका कहना है कि यदि योजना का उद्देश्य बालिकाओं को शिक्षा से जोड़ना है तो उन्हें गुणवत्तापूर्ण और भरोसेमंद साइकिल उपलब्ध कराना भी शासन की जिम्मेदारी है।
बिना बिल और वारंटी कैसे मिलेगा अधिकार?
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि अधिकांश छात्राओं को साइकिल वितरण के समय बिल, वारंटी कार्ड या खरीद संबंधी अन्य दस्तावेज नहीं दिए जाते। इससे साइकिल चोरी होने, वारंटी क्लेम करने या किसी अन्य प्रशासनिक एवं कानूनी प्रक्रिया के दौरान छात्राओं और उनके अभिभावकों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
रवि भगत ने मांग की है कि आगामी वितरण से पहले सभी साइकिलों का तकनीकी परीक्षण कराया जाए और प्रत्येक छात्रा को दस्तावेजों का पूरा सेट उपलब्ध कराया जाए, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की समस्या उत्पन्न न हो।
मांगें नहीं मानी गईं तो होगा विरोध प्रदर्शन
रवि भगत ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि समय रहते प्रशासन ने इस मामले में उचित कार्रवाई नहीं की तो लैलूंगा में साइकिल वितरण कार्यक्रम के दौरान विरोध प्रदर्शन किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं का उद्देश्य केवल सामग्री बांटना नहीं, बल्कि लाभार्थियों को गुणवत्तापूर्ण सुविधा और उनके अधिकारों की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित करना भी है। प्रशासन को छात्राओं के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए इस मामले में शीघ्र निर्णय लेना चाहिए।
उठ रहे हैं कई अहम सवाल…
क्या सरस्वती साइकिल योजना में गुणवत्ता मानकों का पालन हो रहा है?
छात्राओं को बिल और वारंटी कार्ड क्यों नहीं दिए जा रहे?
क्या संबंधित विभाग वितरण से पहले गुणवत्ता परीक्षण करता है?
यदि साइकिल खराब हो जाए तो उसकी जवाबदेही किसकी होगी?
क्या शासन इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराएगा?
अब निगाहें प्रशासन पर हैं कि वह इन आरोपों को गंभीरता से लेकर पारदर्शिता सुनिश्चित करता है या फिर यह मामला आंदोलन का रूप लेता है।
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