September 24, 2026

डीएमएफ के कामों पर अब डिजिटल पहरा, क्यूआर कोड से होगी रियल-टाइम निगरानी

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घरघोड़ा से शुरू हुआ नया सोशल ऑडिट सिस्टम, स्कैन करते ही सामने आएगी परियोजना की पूरी कुंडली

हर निर्माण स्थल पर अनिवार्य होगी क्यूआर पट्टिका, जियो-टैग फोटो के बिना भुगतान प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ेगी

रायगढ़/घरघोड़ा। जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) से होने वाले विकास कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में रायगढ़ जिला प्रशासन ने डिजिटल निगरानी की नई व्यवस्था लागू की है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में घरघोड़ा विकासखंड के लिए स्वीकृत डीएमएफ परियोजनाओं में ‘स्टैंडर्डाइज्ड प्रोजेक्ट नेमेनक्लेचर एंड रियल-टाइम क्यूआर सोशल ऑडिट’ प्रणाली लागू की जा रही है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और वित्त मंत्री ओपी चौधरी के सुशासन एवं पारदर्शी प्रशासन के विजन के अनुरूप शुरू की गई इस व्यवस्था का उद्देश्य डीएमएफ से स्वीकृत परियोजनाओं को केवल कागजी रिकॉर्ड तक सीमित रखने के बजाय उनकी जमीनी स्थिति की डिजिटल निगरानी सुनिश्चित करना है।

नई व्यवस्था के तहत किसी परियोजना की स्वीकृति से लेकर उसके क्रियान्वयन, प्रगति और भुगतान प्रक्रिया तक की जानकारी को डिजिटल सिस्टम से जोड़ा जाएगा।

🔎 हर परियोजना को मिलेगा अलग प्रोजेक्ट कोड

डीएमएफ की प्रत्येक परियोजना को एक मानकीकृत प्रोजेक्ट कोड दिया जाएगा। इसमें विकासखंड, गांव, सेक्टर, वित्तीय वर्ष और क्रमांक जैसी जानकारियां शामिल रहेंगी।

इसका उद्देश्य परियोजनाओं की पहचान को एकरूप बनाना और एक ही स्थान अथवा कार्य के लिए दोहरे प्रस्ताव एवं दोहरे वित्तपोषण की संभावना को कम करना है।

कलेक्ट्रेट से लेकर संबंधित विभाग, इंजीनियरिंग एजेंसी और ट्रेजरी स्तर तक परियोजना की पहचान एक समान रहेगी। इससे किसी कार्य से जुड़े रिकॉर्ड को ट्रैक करना भी आसान होगा।

📱 एक स्कैन और सामने होगी परियोजना की पूरी जानकारी

नई व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा प्रत्येक निर्माण स्थल पर लगाई जाने वाली वेदरप्रूफ क्यूआर कोड पट्टिका होगी।

आम नागरिक अपने मोबाइल कैमरे से क्यूआर कोड स्कैन कर परियोजना से संबंधित डिजिटल जानकारी देख सकेंगे। इसके लिए किसी विशेष मोबाइल ऐप की आवश्यकता नहीं होगी।

क्यूआर कोड के माध्यम से परियोजना की स्वीकृत लागत, संबंधित एजेंसी, तकनीकी जानकारी और कार्य की प्रगति जैसी जानकारियां उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।

यानी जिस गांव या क्षेत्र में डीएमएफ से काम हो रहा है, वहां रहने वाले ग्रामीण अब केवल बोर्ड देखकर संतुष्ट रहने के बजाय मोबाइल के जरिए परियोजना से जुड़ी जानकारी तक पहुंच सकेंगे।

📍 जियो-टैग फोटो के बाद ही भुगतान की प्रक्रिया

डीएमएफ परियोजनाओं में निगरानी को और प्रभावी बनाने के लिए भुगतान प्रक्रिया को भी क्यूआर सिस्टम से जोड़ा गया है।

निर्धारित प्रक्रिया के तहत संबंधित विभाग अथवा ठेकेदार को कार्यस्थल पर स्थापित क्यूआर पट्टिका की जियो-टैग और टाइम-स्टैम्प वाली फोटो अपलोड करनी होगी।

निर्धारित अनुपालन पूरा होने के बाद ही संबंधित माइलस्टोन भुगतान बिल की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

इससे यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया है कि परियोजना स्थल पर आवश्यक पहचान पट्टिका मौजूद हो और उसकी वास्तविक लोकेशन का डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध रहे।

🗂️ परियोजना के दस्तावेज अब डिजिटल फोल्डर में

प्रोजेक्ट कोड जनरेट होने के बाद परियोजना से जुड़े दस्तावेज और स्वीकृतियां एक केंद्रीकृत डिजिटल फोल्डर में व्यवस्थित की जाएंगी।

इससे संबंधित अधिकारियों को अलग-अलग फाइलों में रिकॉर्ड तलाशने और दस्तावेजों का मिलान करने में आसानी होगी। परियोजना की स्वीकृति, तकनीकी प्रक्रिया और क्रियान्वयन से संबंधित रिकॉर्ड को एक ही डिजिटल सिस्टम में व्यवस्थित रखने की दिशा में इसे महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

🏗️ घरघोड़ा की एजेंसियों को दिया गया प्रशिक्षण

नई डिजिटल व्यवस्था को जमीन पर लागू करने के लिए 24 सितंबर को कलेक्ट्रेट सभा कक्ष में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।

इसमें घरघोड़ा विकासखंड में डीएमएफ के तहत कार्य करने वाली संबंधित एजेंसियों के अधिकारी, अनुविभागीय अधिकारी, इंजीनियर और पोर्टल ऑपरेटर शामिल हुए।

प्रशिक्षण के दौरान पोर्टल संचालन, विभागीय प्रविष्टियां, सिस्टम वेरिफिकेशन, प्रोजेक्ट कोड जनरेशन और कार्यस्थल पर क्यूआर पट्टिका लगाने की प्रक्रिया की जानकारी दी गई।

जिला प्रशासन ने संबंधित एजेंसियों को इस व्यवस्था का अनिवार्य रूप से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

👀 अब ग्रामीण भी बन सकेंगे निगरानी का हिस्सा

डीएमएफ का बड़ा उद्देश्य खनन प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति देना है। ऐसे में क्यूआर सोशल ऑडिट व्यवस्था से स्थानीय ग्रामीणों और ग्राम सभाओं को अपने क्षेत्र में स्वीकृत विकास कार्यों की जानकारी सीधे प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।

किस काम की स्वीकृति हुई, किस एजेंसी को काम दिया गया, कितनी लागत स्वीकृत है और काम किस स्थिति में है—ऐसी जानकारी डिजिटल रूप से उपलब्ध होने से स्थानीय स्तर पर निगरानी और जवाबदेही की भूमिका मजबूत होने की उम्मीद है।

⚡ कागज से जमीन तक पहुंचेगा डीएमएफ का रिकॉर्ड

जिला प्रशासन के अनुसार नई व्यवस्था का लक्ष्य डीएमएफ परियोजनाओं की पहचान, दस्तावेज प्रबंधन, भुगतान प्रक्रिया और जमीनी निगरानी में पारदर्शिता बढ़ाना है।

अब डीएमएफ परियोजना केवल सरकारी फाइल का हिस्सा नहीं रहेगी, बल्कि कार्यस्थल पर लगी क्यूआर पट्टिका के जरिए आम नागरिक भी उससे जुड़ी डिजिटल जानकारी तक पहुंच सकेंगे।

घरघोड़ा से शुरू हुई यह व्यवस्था आने वाले समय में डीएमएफ कार्यों की निगरानी में डिजिटल पारदर्शिता की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव साबित हो सकती है।

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