October 19, 2026

ऑपरेशन क्लीन हंट का शिकंजा: ₹32 लाख के ट्रांसपोर्ट घोटाले का फरार आरोपी कोर्ट में सरेंडर!

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फर्जी बिल-वाउचर से कंपनी को चूना लगाने का आरोप, बैंक खातों और डिजिटल पेमेंट के जरिए रकम का खेल; सह आरोपी पहले ही जेल में

रायगढ़। करीब ₹32 लाख की ट्रांसपोर्ट धोखाधड़ी के चर्चित मामले में कोतवाली पुलिस ने फरार चल रहे आरोपी प्रकाश मिश्रा को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस की लगातार दबिश और बढ़ते दबाव के बीच आरोपी ने न्यायालय में आत्मसमर्पण किया। न्यायालय की अनुमति के बाद कोतवाली पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर रिमांड पर भेज दिया।

मामले में सह आरोपी दीपक शर्मा को पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। अब मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस फर्जी बिल-वाउचर, बैंक खातों और डिजिटल लेनदेन से जुड़े पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।

🔥 एक ही वाउचर नंबर, अलग-अलग वाहन—यहीं से खुला ₹32 लाख के फर्जीवाड़े का खेल

पुलिस के अनुसार श्रीराम ट्रांसपोर्ट, ढिमरापुर चौक के संचालक कमल किशोर शाह ने 24 मार्च 2026 को कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के मुताबिक कंपनी में कार्यरत प्रकाश मिश्रा और दीपक शर्मा ट्रांसपोर्ट वाहनों के बिल-वाउचर तैयार कर भुगतान के लिए प्रस्तुत करते थे।

कंपनी की जांच में जब एक ही क्रमांक के कई वाउचर सामने आए तो मामला संदिग्ध हो गया। सितंबर 2025 से लगातार किए जा रहे कथित फर्जीवाड़े की जांच में सामने आया कि एक ही वाउचर नंबर पर अलग-अलग वाहनों के नाम से डुप्लीकेट वाउचर तैयार कर भुगतान कराया गया।

💥 RTO जांच में खुली पोल—कई वाहन निकले दोपहिया और निजी वाहन

विवेचना के दौरान पुलिस ने कंपनी के बिल-वाउचरों में दर्ज वाहन नंबरों का क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय से सत्यापन कराया। जांच में कई नंबर दोपहिया और छोटे निजी वाहनों के पाए गए।

इन वाहनों का श्रीराम ट्रांसपोर्ट या माल परिवहन से संबंध नहीं मिला। संबंधित वाहन मालिकों से पूछताछ में भी उन्होंने कंपनी के लिए परिवहन कार्य करने से इनकार किया। इसके बाद पुलिस ने फर्जी बिल-वाउचर के जरिए भुगतान हासिल किए जाने के आरोपों की जांच आगे बढ़ाई।

💰 अलग-अलग बैंक खातों में रकम, कमीशन काटकर वापस ट्रांसफर का आरोप

पुलिस के मुताबिक कथित फर्जी भुगतान के लिए संदीप बंसल, जासमिन बंजारा, नेहा चौहान, सूर्यकांत अग्रवाल, कमल बसोड़ एवं प्रियंका गुप्ता के बैंक खातों का उपयोग किया गया।

पुलिस पूछताछ में सह आरोपी दीपक शर्मा ने कथित तौर पर बताया कि खाताधारकों को रकम भेजी जाती थी और वे कमीशन काटने के बाद शेष रकम आरोपियों द्वारा बताए गए बैंक खातों, QR कोड एवं फोन-पे नंबरों पर ट्रांसफर करते थे।

पुलिस के अनुसार दीपक शर्मा ने करीब ₹15 लाख स्वयं रखने तथा ₹16–17 लाख प्रकाश मिश्रा को दिए जाने की जानकारी दी थी। इन बयानों और डिजिटल लेनदेन की पुलिस द्वारा जांच की जा रही है।

🚔 29 जुलाई को पकड़ा गया था सह आरोपी दीपक शर्मा

ऑपरेशन क्लीन हंट के तहत फरार आरोपियों की तलाश के दौरान पुलिस को दीपक शर्मा के अपने मोहल्ले में देखे जाने की सूचना मिली थी। कोतवाली पुलिस ने दबिश देकर 29 जुलाई 2026 को उसे गिरफ्तार किया था।

पूछताछ में पुलिस के अनुसार दीपक ने प्रकाश मिश्रा के साथ मिलकर फर्जी बिल-वाउचर तैयार करने और अलग-अलग वाहन नंबरों के आधार पर भुगतान कराने की जानकारी दी।

⚡ अब डिजिटल ट्रांजेक्शन और बैंक खातों की होगी गहन जांच

प्रकाश मिश्रा की गिरफ्तारी के बाद पुलिस की जांच का फोकस अब बैंक खातों, डिजिटल पेमेंट, QR कोड, फर्जी वाउचर और कथित रकम के अंतिम लाभार्थियों पर है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इस फर्जीवाड़े में अन्य लोगों की भूमिका थी या नहीं।

कोतवाली पुलिस ने प्रकरण में अपराध क्रमांक 187/2026 के तहत धारा 316(5), 338, 336(3), 340(2), 60 BNS में अपराध दर्ज किया है। गिरफ्तार आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे रिमांड पर भेज दिया गया है।

🗣️ एसएसपी का दो टूक संदेश

एसएसपी शशि मोहन सिंह ने कहा कि आर्थिक धोखाधड़ी और वित्तीय अपराधों में शामिल आरोपियों के खिलाफ साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई जारी रहेगी। फर्जी दस्तावेज, बैंक खातों और डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल कर धोखाधड़ी करने वालों की भूमिका की जांच कर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

पूरी कार्रवाई थाना प्रभारी कोतवाली निरीक्षक अमित सिंह, उप निरीक्षक ऐनु देवांगन एवं एएसआई कोसो सिंह की महत्वपूर्ण भूमिका से पूरी हुई।

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