घरघोड़ा में भाजपा की राह कठिन: अधूरे वादों और जनता की नाराजगी से घिरा चुनावी समर

घरघोड़ा।घरघोड़ा नगर पंचायत चुनाव में इस बार भाजपा के लिए हालात विपरीत नजर आ रहे हैं। चार वर्षों के कार्यकाल में नगर के विकास को लेकर जनता में गहरा असंतोष पनप चुका है। हाल ही में नियुक्त भाजपा जिलाध्यक्ष और क्षेत्र के सांसद पार्टी के प्रभावशाली चेहरे होने के बावजूद, वर्तमान चुनावी माहौल भाजपा के लिए कठिन होता जा रहा है। नगर में अधूरे वादों और जनता की नाराजगी के कारण भाजपा के लिए इस बार सरकार बनाना मुश्किल दिख रहा है। हालांकि बीजेपी सत्तारूढ़ पार्टी है, सांसद और जिला अध्यक्ष लोकल हैं, पर केवल इनके प्रभाव के बल पर चुनावी नैय्या पार लगाना आसान नहीं होगा।

विकास कार्यों के दावों पर बीजेपी सवालों के घेरे में

भाजपा के 4 वर्ष के कार्यकाल में नगर की बुनियादी समस्याओं को लेकर कोई ठोस समाधान नहीं किया गया। हर गर्मी में नगर के कई वार्डों में पीने के पानी की किल्लत से जनता बेहाल होती रही, लेकिन इस समस्या के स्थायी हल के लिए भाजपा कोई मजबूत कदम नहीं उठा पाई। इसके अलावा, सड़क किनारे ठेला-टपरी लगाकर रोज़गार चलाने वालों को हटाकर उनकी आजीविका छीन ली गई, लेकिन पार्टी नेताओं ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया। उन्हें प्रशासन के कायदों के भरोसे छोड़ दिया गया। इससे जनता में भाजपा के प्रति आक्रोश गहराता गया।

गरीब दुकानदारों की अनदेखी बनी भाजपा के लिए बड़ा संकट

भाजपा शासन में गरीब फुटपाथ दुकानदारों और ठेला-टपरी लगाने वालों के प्रति बेरुखी जनता के गुस्से की एक बड़ी वजह बनी है। वर्षों से सड़क किनारे छोटी दुकानें और ठेले लगाकर अपनी आजीविका चला रहे लोगों को प्रशासन ने जबरन हटा दिया, लेकिन उनकी मदद के लिए कोई नेता खड़ा नहीं हुआ। इन दुकानदारों का कहना है कि उन्होंने किसी तरह अपनी रोज़ी-रोटी जमाई थी, लेकिन नगर प्रशासन ने बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के उन्हें बेरोज़गार कर दिया। इस वजह से प्रभावित परिवारों के साथ-साथ स्थानीय जनता भी भाजपा से नाराज दिख रही है, क्योंकि वे इन गरीब दुकानदारों के लिए सरकार से उम्मीद कर रहे थे। चुनाव में इस नाराजगी का असर साफ दिखाई दे सकता है, और यह भाजपा के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकता है।
त्रिकोणीय मुकाबले ने बढ़ाई भाजपा की मुश्किलें
इस चुनाव में भाजपा को सिर्फ विपक्षी दलों से ही नहीं, बल्कि निर्दलीय प्रत्याशी से भी कड़ी चुनौती मिल रही है। निर्दलीय उम्मीदवार के मैदान में उतरने से मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है, जिससे भाजपा के लिए चुनावी गणित और जटिल हो गया है। नगर में बदलाव की मांग जोर पकड़ रही है, और जनता भाजपा के दावों पर अब आंख मूंदकर भरोसा करने को तैयार नहीं दिख रही।
भाजपा के लिए सरकार बनाना आसान नहीं
जनता के मूड को देखते हुए भाजपा के लिए नगर पंचायत में सरकार बनाना इस बार आसान नहीं दिख रहा। नए जिलाध्यक्ष के सामने संगठन को मजबूत करने की चुनौती है, लेकिन जनता की नाराजगी दूर किए बिना यह राह आसान नहीं होगी। वहीं, विपक्ष और निर्दलीय प्रत्याशी अपने-अपने तरीके से जनता को लुभाने में जुटे हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा अपने आधार को बचा पाती है या घरघोड़ा की जनता अपनी नाराजगी को वोटों में बदलती है।
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