तलाईपाली कोयला परियोजना में कथित भुगतान को लेकर बवाल, कलेक्टर से शिकायत
ग्रामीणों ने लगाया गंभीर आरोप—हड़ताल खत्म कराने के एवज में सूरज गुप्ता को 5 से 7 करोड़ रुपये दिए जाने का दावा; NTPC प्रबंधन और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग
रायगढ़/घरघोड़ा। तलाईपाली कोयला खनन परियोजना से जुड़े एक गंभीर मामले ने जिले के प्रशासनिक एवं औद्योगिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। प्रभावित आठ गांवों के ग्रामीणों की ओर से जिलाधीश रायगढ़ को लिखित शिकायत देकर NTPC Mining Limited की तलाईपाली परियोजना से जुड़े कथित भुगतान, समझौते और ग्रामीणों की मांगों को प्रभावित करने के आरोपों की उच्चस्तरीय जांच की मांग की गई है।

शिकायत में ग्राम तलाईपाली निवासी सूरज गुप्ता, पिता स्व. टीकाराम गुप्ता पर ग्रामीणों के नाम से परियोजना संबंधी दस्तावेज अपने पास रखने तथा ग्रामीणों की मांगों के संबंध में कथित रूप से कंपनी के साथ मध्यस्थता करने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, ये सभी आरोप शिकायतकर्ताओं द्वारा लगाए गए हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
🔥 *5 से 7 करोड़ के कथित भुगतान का आरोप*
ग्रामीणों ने शिकायत में दावा किया है कि NTPC तलाईपाली कोयला खनन परियोजना तथा उससे संबंधित कंपनी VPR Pvt. के बीच हुए कथित समझौते में ग्रामीणों की जानकारी और सहमति के बिना सूरज गुप्ता के माध्यम से ग्रामीणों को समझाने/मनाने तथा आंदोलन समाप्त कराने के एवज में लगभग 5 से 7 करोड़ रुपये की राशि दिए जाने की जानकारी उन्हें मिली है।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि उक्त राशि को सूरज गुप्ता तथा उनके संबंधित परिवारजनों के बैंक खातों में जमा कराया गया। ग्रामीणों ने इस पूरे लेन-देन की बैंकिंग रिकॉर्ड, भुगतान स्वीकृति, बैठक कार्यवाही और समझौते के दस्तावेजों के आधार पर जांच कराने की मांग की है।
⚠️ *NTPC के अधिकारियों और प्रबंधन पर भी उठे सवाल*❓
मामले में शिकायतकर्ताओं ने केवल कथित बिचौलिये की भूमिका पर ही सवाल नहीं उठाए, बल्कि NTPC प्रबंधन एवं परियोजना से जुड़े अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की मांग की है।
शिकायत के अनुसार, ग्रामीणों और कंपनी के बीच हुए कथित संवाद एवं समझौते में NTPC के कर्मचारी अच्युतानंद साहू (AGM) की भूमिका का उल्लेख किया गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि कंपनी के भीतर हुई बैठकों में सूरज गुप्ता को भुगतान किए जाने के संबंध में सहमति बनी भुगतान की जिम्मेदारी *अच्युतानंद साहू* को दी गई।
यह आरोप भी शिकायत में ही दर्ज है; इसकी सत्यता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
*🏭 कंपनी प्रबंधन से जवाब मांगने की जरूरत*
पूरे मामले में अब सबसे बड़ा सवाल NTPC Mining Limited के तलाईपाली परियोजना प्रबंधन की कार्यप्रणाली को लेकर खड़ा हो रहा है।
यदि वास्तव में ग्रामीणों की मांगों, आंदोलन अथवा हड़ताल को समाप्त कराने के लिए किसी निजी व्यक्ति को करोड़ों रुपये का भुगतान किया गया है, तो—
✨भुगतान किस स्वीकृति के आधार पर हुआ?
⚡राशि किस मद से जारी की गई?
✨किस अधिकारी ने भुगतान को स्वीकृति दी?
⚡समझौते में संबंधित व्यक्ति की अधिकृत भूमिका क्या थी?
✨क्या प्रभावित ग्रामीणों की लिखित सहमति ली गई थी?
⚡राशि किस खाते में और किस उद्देश्य से हस्तांतरित हुई?
✨क्या NTPC की आंतरिक वित्तीय एवं सतर्कता प्रक्रिया का पालन किया गया?
इन सवालों के जवाब कंपनी प्रबंधन और संबंधित अधिकारियों से मांगे जाने की जरूरत है।
*👮 कलेक्टर से लेकर EOW तक शिकायत*
ग्रामीणों ने मामले को गंभीर बताते हुए शिकायत की प्रतिलिपि पुलिस अधीक्षक रायगढ़, SDM घरघोड़ा, NTPC तलाईपाली परियोजना प्रमुख, NTPC के महाप्रबंधक/क्षेत्रीय महाप्रबंधक, आयुक्त बिलासपुर संभाग, खनिज संसाधन विभाग, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग तथा आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) सहित विभिन्न अधिकारियों को भेजी है।
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने पूर्व में अपनी मांगों को लेकर कई बार आवेदन दिए, लेकिन अपेक्षित समाधान नहीं होने पर आंदोलन और हड़ताल का सहारा लेना पड़ा। शिकायत में दावा किया गया है कि बाद में बातचीत के माध्यम से आंदोलन समाप्त कराया गया, लेकिन उनकी प्रमुख मांगें अब भी पूरी नहीं हुईं।
*🏠मकान तोड़ने और जमीन नहीं छोड़ने की चेतावनी*
शिकायत के अंतिम हिस्से में प्रभावित ग्रामीणों ने कहा है कि जब तक कथित भ्रष्टाचार एवं पूरे प्रकरण की जांच नहीं हो जाती, वे अपने मकान नहीं तोड़ेंगे और जमीन नहीं छोड़ेंगे।
ग्रामीणों ने जिलाधीश से पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए दस्तावेजों की जांच, बैंक खातों की जांच, संबंधित अधिकारियों एवं कंपनी प्रतिनिधियों से पूछताछ तथा दोष सिद्ध होने पर कठोर कार्रवाई की मांग की है।
*🔎 अब जांच पर टिकी निगाहें*
करोड़ों रुपये के कथित भुगतान और ग्रामीणों के आंदोलन को प्रभावित करने के आरोपों ने NTPC प्रबंधन की पारदर्शिता और परियोजना से जुड़े अधिकारियों की भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन शिकायत पर क्या कार्रवाई करता है और क्या संबंधित कंपनी व अधिकारियों से रिकॉर्ड तलब कर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाती है।
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