September 24, 2026

घरघोड़ा में खाकी की चुप्पी या अपराधियों को ‘अभयदान’? एसएसपी शशि मोहन सिंह की सख्ती का यहाँ क्यों नहीं दिख रहा असर?..

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घरघोड़ा । जिले के अन्य थाना क्षेत्रों में जब पुलिस की ताबड़तोड़ कार्रवाई से अपराधियों में हड़कंप मचा है, तब आखिर घरघोड़ा क्षेत्र में ‘शांति’ क्यों है? क्या यहाँ का अवैध नेटवर्क कानून से ऊपर हो चुका है, या फिर जिम्मेदार अधिकारियों ने अपनी आँखें मूंद ली हैं? नगर सहित ग्रामीण अंचलों में बढ़ते जुआ, सट्टा, गांजा और बालू के अवैध उत्खनन ने अब जनआक्रोश को ज्वालामुखी बना दिया है।

नदियों का सीना चीर रहे बालू माफिया :स्थानीय लोगों का सीधा आरोप है कि घरघोड़ा क्षेत्र की नदियों से दिन-दहाड़े बालू का अवैध उत्खनन और परिवहन बेखौफ जारी है। बिना किसी डर के दौड़ते ट्रैक्टर और हाइवा इस बात का प्रमाण हैं कि माफियाओं को प्रशासन का कोई खौफ नहीं रह गया है। आखिर यह ‘पीला सोना’ किसकी जेब भर रहा है?

जुआ-सट्टा और नशे का मकड़जाल :घरघोड़ा अब केवल शांतिप्रिय क्षेत्र नहीं रहा, बल्कि जुए और सट्टे के अड्डों का गढ़ बनता जा रहा है। गली-मोहल्लों में बिक रहा अवैध गांजा और शराब युवाओं की रगों में जहर घोल रहे हैं। चोरी और कबाड़ के धंधे ने आम नागरिकों की नींद उड़ा दी है। जागरूक नागरिकों का बड़ा सवाल है – “किसके संरक्षण में फल-फूल रहा है यह काला साम्राज्य?”

एसएसपी शशि मोहन सिंह से ‘न्याय’ की आस: रायगढ़ जिले के अन्य हिस्सों में एसएसपी शशि मोहन सिंह के नेतृत्व में पुलिस जिस तरह एक्शन मोड में है, उससे घरघोड़ा के लोगों की उम्मीदें भी जागी हैं। लेकिन, जमीनी हकीकत यह है कि यहाँ की पुलिस अब तक उस लय में नजर नहीं आई है। जनता अब सीधे कप्तान से हस्तक्षेप की मांग कर रही है।

“हम चाहते हैं कि घरघोड़ा थाना क्षेत्र में भी विशेष अभियान चले। जब तक जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक ये अपराधी इसी तरह कानून का मजाक उड़ाते रहेंगे।” – व्यथित स्थानीय नागरिक

जनभावनाओं की प्रमुख मांगें :

* संयुक्त स्ट्राइक: खनिज और पुलिस विभाग मिलकर बालू माफियाओं पर विशेष अभियान चलाएं।
* सर्जिकल रेड: चिन्हित जुआ-सट्टा और नशे के ठिकानों पर बिना पूर्व सूचना के छापेमारी हो।
* जवाबदेही: उन बीट प्रभारियों और जिम्मेदार अधिकारियों पर गाज गिरे, जिनके क्षेत्र में यह अवैध कारोबार फल-फूल रहा है।
* सतत निगरानी: नशे के सौदागरों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाए।

कानून-व्यवस्था पर गहराते सवाल :यदि समय रहते घरघोड़ा की फिजां से इस काले कारोबार को साफ नहीं किया गया, तो आने वाले समय में कानून-व्यवस्था की स्थिति और बिगड़ सकती है। अब गेंद प्रशासन के पाले में है – क्या घरघोड़ा में भी खाकी का इकबाल बुलंद होगा, या फिर सट्टे की पर्ची और बालू की ट्रॉली ही यहाँ का भविष्य तय करेगी?

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