October 19, 2026

28 सितंबर की जनसुनवाई से पहले B.S. Sponge Iron पर बवाल!

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युवा संगठन ने खोला मोर्चा—खसरा 86 की 1979 से जांच, पर्यावरणीय स्वीकृतियों से लेकर भारी वाहनों तक उठाए सवाल

“जांच के बिना जनसुनवाई स्वीकार नहीं” — जने कुर्रे | मांग पूरी नहीं हुई तो लोकतांत्रिक विरोध की चेतावनी



घरघोड़ा। ग्राम चारमार–भेंगारी–नवापारा में B.S. Sponge Iron Pvt. Ltd. की प्रस्तावित/संबंधित औद्योगिक परियोजना को लेकर 28 सितंबर की पर्यावरण जनसुनवाई से पहले विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। युवा संगठन, घरघोड़ा ने एसडीएम घरघोड़ा को आवेदन सौंपकर भूमि रिकॉर्ड से लेकर पर्यावरणीय स्वीकृति, प्रदूषण नियंत्रण, जल उपयोग और भारी वाहनों की आवाजाही तक कई गंभीर बिंदुओं की संयुक्त एवं मौके पर जांच कराने की मांग की है।

संगठन ने दो टूक कहा है कि जब तक भूमि और परियोजना से जुड़े दस्तावेजी सवालों की निष्पक्ष जांच नहीं होती, तब तक जनसुनवाई को महज औपचारिक प्रक्रिया नहीं बनने दिया जाएगा।

✨खसरा 86 पर सबसे बड़ा सवाल—1979 से खंगालने की मांग

युवा संगठन ने खसरा नंबर 86 और उससे जुड़े उप-खसरों को लेकर वर्ष 1979 से वर्तमान तक की पूरी राजस्व श्रृंखला की जांच की मांग की है।

आवेदन में बंटवारा, फौती, नामांतरण, हस्तांतरण, विक्रय और स्वामित्व से जुड़े दस्तावेजों की जांच के साथ पुराने राजस्व रिकॉर्ड और वर्तमान अभिलेखों का मिलान कराने की मांग की गई है।

संगठन का कहना है कि भूमि से जुड़े सभी तथ्यों के स्पष्ट हुए बिना परियोजना से संबंधित विवादित बिंदुओं पर आगे बढ़ना ग्रामीणों के हित में नहीं होगा।

🛑कागज नहीं, जमीन पर जांच चाहिए

पर्यावरणीय स्वीकृतियों को लेकर भी संगठन ने प्रशासन के सामने कई सवाल रखे हैं। Environmental Clearance, Consent to Establish और Consent to Operate सहित अन्य वैधानिक अनुमतियों की जांच की मांग की गई है।

इसके अलावा उत्पादन क्षमता, प्रदूषण नियंत्रण उपकरण, जल उपयोग, ETP, Fly Ash, Slag, Green Belt, वायु-पानी-मिट्टी की गुणवत्ता, ध्वनि प्रदूषण और अग्निशमन व्यवस्था की मौके पर भौतिक जांच कराने की मांग की गई है।

युवा संगठन का सवाल है कि फाइलों में दर्ज व्यवस्थाएं जमीन पर वास्तव में कितनी प्रभावी हैं, इसका सत्यापन कौन करेगा?

✨भारी वाहनों की आवाजाही से ग्रामीण सुरक्षा पर सवाल

औद्योगिक गतिविधियों के साथ बढ़ने वाली भारी वाहनों की आवाजाही को लेकर भी संगठन ने चिंता जताई है। ग्रामीण आबादी, स्कूल, बाजार और मुख्य सड़कों पर इसके संभावित प्रभाव को देखते हुए परिवहन मार्ग, पार्किंग, सड़क रखरखाव, दुर्घटना नियंत्रण, जाम की स्थिति और धूल नियंत्रण की व्यवस्था की जांच की मांग की गई है।

✨एक विभाग नहीं—संयुक्त टीम से जांच की मांग

युवा संगठन ने राजस्व, पर्यावरण/प्रदूषण नियंत्रण, जल संसाधन, सड़क विभाग, पुलिस प्रशासन सहित संबंधित विभागों की संयुक्त टीम गठित कर मौके पर निरीक्षण कराने की मांग की है।

संगठन का कहना है कि केवल कार्यालय में बैठकर फाइलें देखने से जमीनी हकीकत सामने नहीं आएगी। दस्तावेज और मौके की स्थिति का आमने-सामने मिलान जरूरी है।

✨28 सितंबर से पहले जांच नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी

युवा संगठन ने साफ कर दिया है कि यदि जनसुनवाई से पहले उठाए गए सवालों पर निष्पक्ष जांच नहीं होती, रिकॉर्ड स्पष्ट नहीं किए जाते और ग्रामीणों की आपत्तियों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जाता है, तो संगठन ग्रामीणों के साथ लोकतांत्रिक एवं वैधानिक तरीके से विरोध प्रदर्शन करेगा।

संगठन ने स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य कानून-व्यवस्था बिगाड़ना नहीं, बल्कि भूमि अधिकार, पर्यावरण, जल, कृषि, सड़क सुरक्षा और ग्रामीण हितों से जुड़े सवालों को प्रशासन के सामने मजबूती से रखना है।

✨“पहले जांच, फिर जनसुनवाई की प्रक्रिया”—जने कुर्रे

युवा संगठन घरघोड़ा रायगढ़ के अध्यक्ष जने कुर्रे ने कहा कि चारमार, भेंगारी और नवापारा की भूमि तथा B.S. Sponge Iron से जुड़े मामले में किसी भी प्रकार की जल्दबाजी स्वीकार नहीं की जाएगी।

उन्होंने कहा कि खसरा नंबर 86 एवं संबंधित उप-खसरों की वर्ष 1979 से वर्तमान तक की पूरी राजस्व श्रृंखला की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। भूमि का बंटवारा, नामांतरण, फौती, हस्तांतरण और विक्रय किस आधार पर हुआ, इसका रिकॉर्ड स्पष्ट होना चाहिए।

जने कुर्रे ने कहा कि संगठन केवल कागजी जांच नहीं चाहता। पर्यावरण, प्रदूषण, जल, सड़क, भारी वाहनों की आवाजाही और ग्रामीणों की सुरक्षा—सभी बिंदुओं पर मौके की संयुक्त जांच जरूरी है।

उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन मांगों को गंभीरता से नहीं लेता और जनसुनवाई को महज औपचारिकता बनाने का प्रयास होता है, तो युवा संगठन ग्रामीणों के साथ मिलकर कंपनी की प्रस्तावित परियोजना के विरोध में लोकतांत्रिक एवं वैधानिक आंदोलन करेगा।

💥जने कुर्रे का कहना है—“विकास का विरोध नहीं है, लेकिन विकास के नाम पर ग्रामीणों की भूमि, पर्यावरण, जल और सुरक्षा से समझौता स्वीकार नहीं होगा। पहले सभी तथ्यों की निष्पक्ष जांच हो, रिपोर्ट और कार्रवाई ग्रामीणों के सामने रखी जाए, उसके बाद ही आगे की प्रक्रिया बढ़ाई जाए।”

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