September 24, 2026

एसईसीएल की दुर्गापुर कोयला खदान परियोजना पर ग्रामीणों का बड़ा विरोध – बिना जनसहमति जबरन सर्वे का प्रयास!…

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रायगढ़। जिले के धरमजयगढ़ में एसईसीएल की प्रस्तावित दुर्गापुर कोयला खदान परियोजना एक बार फिर विवादों में घिर गई है। प्रभावित ग्रामवासियों ने साफ़ शब्दों में प्रशासन को चेतावनी दी है कि बिना जनसहमति के किसी भी तरह का सर्वे या भूमि संबंधी कार्य न्यायसंगत नहीं होगा। ग्रामीणों ने इस संबंध में अनुविभागीय अधिकारी (रा.) एवं सहा. भू-अर्जन अधिकारी धरमजयगढ़ को लिखित में आवेदन सौंपा है।

ग्रामवासियों का आरोप है कि एसईसीएल प्रबंधन और प्रशासन के बीच अब तक कोई सहमति नहीं बनी है, इसके बावजूद कंपनी की ओर से खसरा-रकबा और वृक्ष सर्वेक्षण जैसे कार्यों की तैयारी चल रही है। ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा है कि यह पूरी प्रक्रिया जनविरोधी और कानूनविहीन है, क्योंकि प्रभावित क्षेत्र अभी अधिसूचित नहीं हुआ है।

“हमारी जमीन पर हमारी अनुमति के बिना कोई प्रवेश नहीं करेगा” – ग्रामसभा का निर्णय

ग्रामवासियों ने बताया कि प्रस्तावित खदान के विरोध में पहले ही सभी प्रभावित पंचायतों की ग्रामसभाओं ने खदान विरोधी प्रस्ताव पारित कर शासन-प्रशासन को अवगत कराया था। इसके बावजूद प्रशासन चुप्पी साधे हुए है और कंपनी स्थानीय स्तर पर लोगों को “मुआवज़े के नाम पर भ्रमित करने” का प्रयास कर रही है।

कानून और न्याय दोनों की अनदेखी : ग्रामीणों ने पत्र में कहा है कि जिस क्षेत्र में कंपनी खदान खोलने की योजना बना रही है, वह अभी तक अधिसूचित क्षेत्र नहीं है, इसलिए किसी भी तरह का खनन सर्वेक्षण या भूमि माप कार्य कानूनी रूप से अवैध है। इसके बावजूद एसईसीएल लगातार अधिकारियों की मिलीभगत से अनधिकृत कार्यों की कोशिश कर रही है।

ग्रामवासियों की चेतावनी : प्रभावित ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि जब तक एसईसीएल और ग्रामसभा के बीच लिखित सहमति नहीं बन जाती, तब तक किसी भी प्रकार का सर्वे या ड्रोन सर्वेक्षण न कराया जाए।
उन्होंने कहा –

“अगर बिना अनुमति कोई भी हमारी ज़मीन में प्रवेश करेगा तो हम शांत नहीं बैठेंगे। यह हमारी ज़मीन, हमारा जंगल और हमारा अस्तित्व है।”

इन गांवों के ग्रामीण हुए एकजुट : दुर्गापुर, शाहपुर, धरमजयगढ़, धरमजयगढ़ कालोनी, तराईमगर, बायसी, और बायसी कालोनी के ग्रामीणों ने संयुक्त रूप से हस्ताक्षर कर प्रशासन को यह पत्र सौंपा है।

जनविरोध की आवाज़ – एसईसीएल की यह परियोजना धरमजयगढ़ क्षेत्र में सैकड़ों एकड़ उपजाऊ जमीन, जंगल और जलस्रोतों को प्रभावित करेगी। ग्रामीणों का कहना है कि वे रोजगार या मुआवज़े के झूठे वादों के बजाय अपनी ज़मीन और पर्यावरण की रक्षा के लिए हर स्तर पर संघर्ष करेंगे।

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