पेलमा जनसुनवाई पर फूटा जनाक्रोश: “लिखित समझौता नहीं तो जनसुनवाई नहीं”, 4000 ग्रामीणों ने दी आर-पार की चेतावनी!
⚡ अडानी-एसईसीएल परियोजना के खिलाफ छह पंचायतों का महाएकजुट प्रदर्शन, मुआवजा और पुनर्वास पर प्रशासन को घेरा
रायगढ़। तमनार क्षेत्र में प्रस्तावित एसईसीएल एमडीओ अडानी कंपनी की पर्यावरणीय जनसुनवाई से पहले माहौल पूरी तरह गरमा गया है। ग्राम पेलमा में 08 जून को प्रस्तावित जनसुनवाई को लेकर हजारों ग्रामीणों का गुस्सा सड़कों पर उतर आया है। छह ग्राम पंचायतों के ग्रामीणों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर दो टूक शब्दों में कहा है—”जब तक हमारी मांगों पर लिखित समझौता नहीं होगा, तब तक जनसुनवाई नहीं होने देंगे।”

🔥 मुआवजा-पुनर्वास बना सबसे बड़ा मुद्दा
ग्राम जरीडीह, हिंझर, उरबा, लालपुर, पेलमा और मिलूपारा के ग्रामीणों का आरोप है कि वर्षों से प्रभावित परिवारों के भविष्य को लेकर कोई स्पष्ट नीति नहीं बनाई गई। ग्रामीणों का कहना है कि अलग-अलग गांवों के लिए अलग-अलग मुआवजा दरें तय करना अन्यायपूर्ण है और इससे सामाजिक असंतुलन पैदा होगा।
ग्रामीणों ने मांग की है कि सभी प्रभावित गांवों के लिए एक समान मुआवजा नीति लागू की जाए तथा पुनर्वास की स्पष्ट लिखित गारंटी दी जाए।
⚠️ 2 एकड़ जमीन के बदले नौकरी की मांग
ग्रामीणों ने साफ कहा है कि केवल मुआवजा नहीं, बल्कि प्रभावित परिवारों के स्थायी भविष्य की भी व्यवस्था होनी चाहिए। मांग की गई है कि 2 एकड़ भूमि के बदले एक सरकारी नौकरी दी जाए और भूमिहीन परिवारों को भी मुआवजा एवं रोजगार में प्राथमिकता मिले।
🌾 गोंडवाना समाज के अधिकारों का भी मुद्दा गरमाया
ग्रामीणों ने यह भी सवाल उठाया है कि पूर्वजों के समय से सामूहिक पट्टों में दर्ज गोंडवाना परिवारों को भी समान अधिकार और मुआवजा दिया जाए। उनका कहना है कि किसी भी परिवार के साथ भेदभाव स्वीकार नहीं किया जाएगा।
🚨 4000 ग्रामीणों का अल्टीमेटम, प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती
24 मई 2026 को आयोजित विशेष ग्रामसभा में सर्वसम्मति से लिए गए निर्णय का हवाला देते हुए ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि 08 जून को उनकी सहमति के बिना जनसुनवाई कराने की कोशिश की गई तो 4000 से अधिक प्रभावित ग्रामीण लोकतांत्रिक तरीके से विरोध प्रदर्शन करेंगे।
ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा है कि ऐसी स्थिति में उत्पन्न होने वाली कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी पूरी तरह प्रशासन की होगी।
💥 अब सवाल—संवाद होगा या टकराव?
ज्ञापन में मांग की गई है कि नई जनसुनवाई की तारीख तभी तय की जाए जब सभी मुद्दों पर लिखित समझौता हो जाए और प्रभावित ग्रामीणों की सहमति प्राप्त कर ली जाए।
अब पूरे जिले की निगाहें 08 जून पर टिकी हैं। सवाल सिर्फ जनसुनवाई का नहीं, बल्कि यह भी है कि विकास परियोजनाओं में स्थानीय लोगों की आवाज सुनी जाएगी या फिर एक बार फिर टकराव की स्थिति बनेगी।
👉 08 जून को पेलमा में क्या होगा? संवाद, समझौता या बड़ा आंदोलन…!
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