July 15, 2026

“स्कूल से उठी बदलाव की हुंकार” : केराखोल में नई शाला प्रबंधन समिति का गठन, नशामुक्ति की शपथ और साक्षरता रैली से गूंजा पूरा गांव

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🔸 तमनार के प्राथमिक शाला केराखोल ने पेश की मिसाल, समिति गठन को बनाया सामाजिक जागरूकता का अभियान

घरघोड़ा । तमनार विकासखंड शिक्षा अधिकारी मोनिका गुप्ता के निर्देशानुसार शासकीय प्राथमिक शाला केराखोल में शाला प्रबंधन एवं विकास समिति (SMDC) का गठन उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। लेकिन यह आयोजन केवल समिति के गठन तक सीमित नहीं रहा। विद्यालय परिवार ने इसे शिक्षा, नशामुक्ति और सामाजिक जागरूकता के जनअभियान का रूप देकर पूरे क्षेत्र में एक सकारात्मक संदेश दिया।

विद्यालय के प्रधान पाठक एवं नवाचारी शिक्षक चंद्रमणि चौहान तथा सहायक शिक्षक कुलभूषण राठिया के नेतृत्व में आयोजित बैठक में बड़ी संख्या में पालक, ग्रामीण और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सर्वसम्मति से घुराउ राम राठिया को शाला प्रबंधन एवं विकास समिति का अध्यक्ष तथा रोहिणी बसंत राठिया को उपाध्यक्ष चुना गया। समिति के गठन के साथ ही सभी सदस्यों ने विद्यालय के शैक्षणिक स्तर को बेहतर बनाने, बच्चों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने और शाला के विकास में सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम की सबसे खास बात यह रही कि नवाचारी शिक्षक चंद्रमणि चौहान ने समिति गठन को केवल औपचारिकता तक सीमित न रखते हुए उपस्थित पालकों, नवनिर्वाचित पदाधिकारियों और ग्रामीणों को नशामुक्त समाज के निर्माण की शपथ दिलाई। सभी ने संकल्प लिया कि वे स्वयं नशे से दूर रहेंगे, अपने परिवार और समाज को भी नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करेंगे तथा युवाओं को इस बुराई से बचाने के लिए निरंतर प्रयास करेंगे।

इसके बाद विद्यालय परिवार और ग्रामीणों ने पूरे गांव में साक्षरता जागरूकता रैली निकाली। रैली के माध्यम से ग्रामीणों को शिक्षा का महत्व, प्रत्येक बच्चे को विद्यालय भेजने की आवश्यकता, नियमित अध्ययन, स्वच्छता, सामाजिक जिम्मेदारी तथा नशामुक्त जीवन का संदेश दिया गया। गांव की गलियों में गूंजते जागरूकता नारों ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया और ग्रामीणों ने इस पहल की खुलकर सराहना की।

रैली के दौरान कई ग्रामीणों ने कहा कि विद्यालय केवल बच्चों को पढ़ाने का स्थान नहीं है, बल्कि समाज को सही दिशा देने का भी सबसे मजबूत माध्यम है। उन्होंने विद्यालय परिवार के इस प्रयास की प्रशंसा करते हुए शाला के विकास, बच्चों की शिक्षा और सामाजिक अभियानों में हरसंभव सहयोग देने का भरोसा दिलाया।

प्राथमिक शाला केराखोल की यह पहल इस बात का उदाहरण बन गई कि यदि शिक्षक चाहें तो विद्यालय को सामाजिक परिवर्तन का केंद्र बनाया जा सकता है। समिति गठन के साथ शिक्षा, साक्षरता और नशामुक्ति को जोड़कर विद्यालय ने एक ऐसा संदेश दिया है, जो केवल छात्रों तक नहीं बल्कि पूरे गांव तक पहुंचा और समाज में सकारात्मक बदलाव की नई उम्मीद जगाई।