ऑपरेशन क्लीन हंट : फर्जी अंकसूची से सरकारी नौकरी दिलाने वाले मास्टरमाइंड पर रायगढ़ पुलिस का शिकंजा
ग्रामीण डाक सेवक भर्ती घोटाले का मुख्य आरोपी कोरबा से गिरफ्तार, फर्जी 10वीं की अंकसूची बनवाकर लाखों की ठगी का खुलासा
पहले दो अभ्यर्थी भेजे जा चुके हैं जेल, अब मास्टरमाइंड भी गिरफ्तार; फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले पूरे नेटवर्क की जांच तेज
रायगढ़। सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर फर्जी शैक्षणिक दस्तावेज तैयार कर युवाओं से लाखों रुपये ऐंठने वाले गिरोह के खिलाफ रायगढ़ पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह के निर्देशन में चलाए जा रहे “ऑपरेशन क्लीन हंट” के तहत सिटी कोतवाली पुलिस ने लंबे समय से फरार चल रहे मामले के मुख्य आरोपी विनोद कुमार राठौर को कोरबा से गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी पर फर्जी 10वीं की अंकसूची उपलब्ध कराकर भारतीय डाक विभाग में ग्रामीण डाक सेवक (डाकपाल) की नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों रुपये की ठगी करने का आरोप है।
पुलिस ने आरोपी को कोरबा से हिरासत में लेकर रायगढ़ लाकर पूछताछ की। पूछताछ में आरोपी ने सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर फर्जी अंकसूचियां उपलब्ध कराने और धोखाधड़ी करने की बात स्वीकार की। इसके बाद उसे विधिवत गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया। इस प्रकरण में इससे पहले दो अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है।
ऐसे खुला फर्जी भर्ती का खेल
पुलिस के अनुसार जुलाई 2023 में भारतीय डाक विभाग द्वारा ग्रामीण डाक सेवकों की भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई थी। इस दौरान सक्ती जिले के नरेन्द्र कुमार और जांजगीर-चांपा जिले की सोनम साहू ने ऑनलाइन आवेदन करते समय कक्षा 10वीं की अंकसूची प्रस्तुत की। प्रस्तुत अंकों के आधार पर दोनों का चयन रायगढ़ डाक संभाग के अंतर्गत क्रमशः बर्रा और सुलेसा शाखा में ग्रामीण डाक सेवक (डाकपाल) पद के लिए हो गया।
नियुक्ति से पहले दस्तावेजों के सत्यापन के दौरान संबंधित अंकसूचियों की जांच तमिलनाडु बोर्ड से कराई गई। जांच रिपोर्ट में सामने आया कि दोनों अंकसूचियां पूरी तरह फर्जी हैं और संबंधित बोर्ड ने ऐसी कोई अंकसूची कभी जारी ही नहीं की थी। इसके बाद अधीक्षक डाकघर रायगढ़ की शिकायत पर थाना सिटी कोतवाली में अपराध दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू की।
तीन से साढ़े तीन लाख रुपये में नौकरी का सौदा
विवेचना के दौरान पुलिस ने फरवरी 2026 में दोनों अभ्यर्थियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पूछताछ में उन्होंने बताया कि सरकारी नौकरी की तलाश के दौरान उनकी मुलाकात कोरबा निवासी विनोद कुमार राठौर से हुई थी।
आरोप है कि विनोद राठौर ने सरकारी नौकरी दिलाने का भरोसा देकर तीन से साढ़े तीन लाख रुपये की मांग की। नरेन्द्र कुमार ने आरोपी को 3.50 लाख रुपये दे दिए, जबकि सोनम साहू ने नौकरी लगने के बाद भुगतान करने की बात कही थी। आरोपी ने दोनों को फर्जी 10वीं की अंकसूचियां उपलब्ध कराईं, जिनका उपयोग उन्होंने भर्ती प्रक्रिया में किया। दस्तावेज सत्यापन के दौरान फर्जीवाड़ा सामने आने पर दोनों की नियुक्ति तत्काल निरस्त कर दी गई।
इसके बाद पुलिस ने दोनों अभ्यर्थियों से फर्जी अंकसूचियां तथा उनके वास्तविक शैक्षणिक दस्तावेज जब्त कर उन्हें गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया था।
मुख्य साजिशकर्ता की तलाश में जुटी थी पुलिस
मामले के सामने आने के बाद मुख्य आरोपी विनोद कुमार राठौर फरार हो गया था। पुलिस लगातार उसकी तलाश कर रही थी। जांच के दौरान यह भी पता चला कि वर्ष 2013 में नकली नोट मामले में उसे 10 वर्ष की सजा हो चुकी है। जेल से रिहा होने के बाद उसने फिर से फर्जी दस्तावेज तैयार कर लोगों को सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर ठगी का नया नेटवर्क खड़ा कर लिया था।
रायगढ़ में उसके खिलाफ मामला दर्ज होने के बाद आरोपी लगातार ठिकाने बदलकर पुलिस से बचने का प्रयास कर रहा था।
कोरबा से दबोचा गया मास्टरमाइंड
ऑपरेशन क्लीन हंट के दौरान पुलिस को सूचना मिली कि आरोपी कोरबा में छिपा हुआ है। सूचना मिलते ही सिटी कोतवाली पुलिस की टीम तत्काल कोरबा पहुंची और योजनाबद्ध कार्रवाई करते हुए विनोद कुमार राठौर (47 वर्ष), निवासी शिवाजी नगर, डंडिया मैदान के पास, थाना सिविल लाइन, जिला कोरबा को गिरफ्तार कर रायगढ़ लाई।
पूछताछ में आरोपी ने फर्जी अंकसूचियां उपलब्ध कराकर सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर धोखाधड़ी करने की बात स्वीकार की। इसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया।
फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले पूरे नेटवर्क की जांच
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी ने अब तक कितने लोगों को फर्जी दस्तावेज उपलब्ध कराए, कितनी भर्ती प्रक्रियाओं में इस गिरोह की भूमिका रही और इस नेटवर्क में अन्य कौन-कौन लोग शामिल हैं। पुलिस को आशंका है कि जांच आगे बढ़ने पर कई और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
इन पुलिस अधिकारियों की रही अहम भूमिका
इस कार्रवाई में थाना प्रभारी निरीक्षक सुखनंदन पटेल, उप निरीक्षक ऐनु देवांगन, सहायक उप निरीक्षक कोसो सिंह जगत, प्रधान आरक्षक मनोज मरावी तथा आरक्षक मुरली मनोहर पटेल की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
एसएसपी शशि मोहन सिंह का संदेश
> “फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से सरकारी नौकरियों में प्रवेश का प्रयास करने वाले तथा ऐसे षड्यंत्र रचने वाले गिरोहों के विरुद्ध रायगढ़ पुलिस लगातार कठोर कार्रवाई कर रही है। युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को कानून से बचने नहीं दिया जाएगा।”
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