फर्जी नामांतरण के बाद विवादित पैतृक जमीन पर जबरदस्ती निर्माण! शिकायत के बाद रुका काम, अब बने हुए निर्माण पर चलेगा बुलडोजर या होगी वैधानिक कार्रवाई?
रायगढ़।रायगढ़ जिले के घरघोड़ा तहसील अंतर्गत ग्राम चारमार में पैतृक भूमि से जुड़े एक विवाद ने पूरे राजस्व महकमे की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पीड़ित पक्ष ने कलेक्टर रायगढ़ को विस्तृत शिकायत सौंपते हुए आरोप लगाया है कि राजस्व अधिकारियों, कर्मचारियों एवं कुछ निजी व्यक्तियों की कथित मिलीभगत से कूटरचित दस्तावेज तैयार कर पैतृक भूमि का अवैध नामांतरण किया गया और बाद में उसी भूमि का पंजीकृत विक्रय भी करा दिया गया।

शिकायत में पूरे मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई की मांग की गई है।
बंटवारा नहीं हुआ… फिर राजस्व रिकॉर्ड में नाम कैसे बदल गए?
शिकायतकर्ता चिंतामणि गुप्ता एवं सरधाकर गुप्ता ने आरोप लगाया है कि ग्राम चारमार स्थित उनकी पैतृक भूमि पर उनका वैधानिक अधिकार होने के बावजूद बिना विधिवत बंटवारा आदेश और बिना उनकी सहमति के राजस्व अभिलेखों में बदलाव कर दिया गया।
शिकायत के अनुसार पूर्वजों के बीच कभी वैधानिक बंटवारा नहीं हुआ था, फिर भी कथित रूप से कुछ लोगों ने राजस्व रिकॉर्ड में अपने और अपने परिजनों के नाम दर्ज करा लिए। इससे पूरे नामांतरण की प्रक्रिया संदेह के घेरे में आ गई है।
बंटवारे का आवेदन लगाया तो खुली कथित गड़बड़ी की परतें
पीड़ित पक्ष का कहना है कि जब उन्होंने अपने हिस्से के बंटवारे के लिए नायब तहसीलदार न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत किया, तब उन्हें कथित फर्जी नामांतरण की जानकारी मिली। शिकायत में पटवारी हल्का क्रमांक-18 सहित अन्य संबंधित अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।
शिकायत के बाद रिकॉर्ड में संशोधन… आखिर क्यों?
आवेदन में आरोप लगाया गया है कि जैसे ही शिकायत की जानकारी संबंधित अधिकारियों तक पहुंची, राजस्व अभिलेखों में तत्काल संशोधन की प्रक्रिया अपनाई गई। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि इससे यह आशंका और गहरी हो गई कि कहीं रिकॉर्ड में की गई कथित गड़बड़ियों को छिपाने का प्रयास तो नहीं किया गया।
नामांतरण के बाद जमीन की बिक्री, अब निर्माण कार्य भी जारी!
शिकायत में आरोप है कि कथित रूप से रिकॉर्ड बदलने के बाद भूमि का पंजीकृत विक्रय भी कर दिया गया। इतना ही नहीं, विवादित भूमि पर निर्माण कार्य भी जारी है, जबकि मामला राजस्व न्यायालय और प्रशासन के संज्ञान में बताया जा रहा है।
यहीं से सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है—यदि भूमि विवाद जांचाधीन है, तो आखिर निर्माण कार्य किसकी अनुमति से और किस आधार पर जारी है?
नायब तहसीलदार का पक्ष: “मामला जांच में है”
इस संबंध में हमने संबंधित क्षेत्र के नायब तहसीलदार से उनका पक्ष जानना चाहा, तो उन्होंने संक्षिप्त जवाब देते हुए कहा कि “मामला जांच में है, जाँच मे ही पता चलेगा ।”
हालांकि इस जवाब के बाद कई महत्वपूर्ण प्रश्न स्वतः खड़े हो जाते हैं—
यदि मामला जांचाधीन है, तो जांच कब से चल रही है?
जांच की वर्तमान स्थिति क्या है?
यदि विवादित भूमि का प्रकरण नायब तहसीलदार न्यायालय में लंबित है, तो वहां निर्माण कार्य कैसे और क्यों जारी है?
क्या संबंधित विभाग ने निर्माण रोकने के लिए कोई आदेश जारी किया?
यदि नहीं, तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है?
कलेक्टर से प्रमुख मांगें:
पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
कथित फर्जी नामांतरण एवं दस्तावेजों की विधिक एवं तकनीकी जांच कराई जाए।
दोषी पाए जाने वाले राजस्व अधिकारियों, कर्मचारियों एवं अन्य संबंधित व्यक्तियों पर कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाए।
विवादित भूमि पर निर्माण कार्य की वैधता की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाए।
वास्तविक भूमिधारकों के वैधानिक अधिकार सुरक्षित कर उन्हें न्याय दिलाया जाए।
अब प्रशासन के सामने सबसे बड़े सवाल…❓
बिना बंटवारा आदेश के नामांतरण कैसे हुआ?
यदि जांच चल रही है, तो निर्माण कार्य क्यों नहीं रोका गया?
पीड़ित की शिकायत के बाद निर्माण कार्य अगर रुका, तो निर्माण कार्य हुआ दीवाल का क्या टूटेगा?
क्या राजस्व रिकॉर्ड से छेड़छाड़ हुई?
शिकायत के बाद रिकॉर्ड में संशोधन किसके आदेश पर किया गया?
क्या पूरे मामले में किसी अधिकारी की जवाबदेही तय होगी?
क्या कलेक्टर इस मामले में स्वतंत्र जांच टीम गठित करेंगे?
> नोट: यह समाचार शिकायतकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत लिखित शिकायत तथा संबंधित अधिकारी से प्राप्त संक्षिप्त प्रतिक्रिया के आधार पर तैयार किया गया है। शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि सक्षम प्रशासनिक जांच के बाद ही होगी। मामले में अन्य संबंधित पक्षों का विस्तृत पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
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