“अब घटनास्थल पर ही खुलेगी जांच की हाईटेक लैब: रायगढ़ को मिली मोबाइल फॉरेंसिक वैन, अपराध जांच में आएगी नई रफ्तार”
🚨 एफएसएल लैब के बाद रायगढ़ पुलिसिंग को मिली एक और बड़ी ताकत
🚨 “लैब ऑन व्हील्स” से मौके पर ही होगी वैज्ञानिक जांच और डिजिटल साक्ष्य संग्रह
🚨 महापौर और एसएसपी ने दिखाई हरी झंडी, आधुनिक तकनीक से सशक्त होगी पुलिस व्यवस्था
रायगढ़। जिले की कानून व्यवस्था और अपराध जांच प्रणाली को आधुनिक और वैज्ञानिक तकनीकों से सशक्त बनाने की दिशा में रायगढ़ को एक बड़ी सौगात मिली है। अब अपराध की घटनाओं की जांच के लिए पुलिस को घटनास्थल से साक्ष्य लेकर लंबी प्रक्रिया का इंतजार नहीं करना पड़ेगा, बल्कि मौके पर ही प्रारंभिक वैज्ञानिक जांच और डिजिटल विश्लेषण किया जा सकेगा। क्षेत्रीय एफएसएल कार्यालय रायगढ़ में आयोजित कार्यक्रम में अत्याधुनिक मोबाइल फॉरेंसिक वैन का शुभारंभ किया गया। इस दौरान महापौर जीवर्धन चौहान, सभापति डिग्रीलाल साहू और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह ने हरी झंडी दिखाकर इस हाईटेक मोबाइल यूनिट को रवाना किया।

शासन द्वारा जिले को उपलब्ध कराई गई यह अत्याधुनिक मोबाइल फॉरेंसिक यूनिट पुलिस विवेचना प्रणाली में एक महत्वपूर्ण बदलाव लाने वाली मानी जा रही है। “लैब ऑन व्हील्स” सुविधा से लैस यह वाहन अब घटनास्थल पर ही प्रारंभिक वैज्ञानिक परीक्षण, साक्ष्य संग्रहण और डिजिटल फॉरेंसिक विश्लेषण करने में सक्षम होगा। इससे अपराध जांच प्रक्रिया तेज होने के साथ-साथ साक्ष्यों की गुणवत्ता और विश्वसनीयता भी बढ़ेगी।
इस अवसर पर महापौर जीवर्धन चौहान ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार पुलिस एवं न्याय व्यवस्था को आधुनिक तकनीकों से सशक्त बनाने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि हाल ही में रायगढ़ में क्षेत्रीय न्यायिक विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल लैब) की स्थापना हुई थी और अब मोबाइल फॉरेंसिक यूनिट की शुरुआत से अपराध जांच प्रणाली को और मजबूती मिलेगी।
उन्होंने कहा कि रायगढ़ में स्थापित एफएसएल लैब से रायगढ़, सक्ती और सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिलों की पुलिस को सीधा लाभ मिल रहा है। पहले वैज्ञानिक परीक्षण के लिए कई मामलों में लंबी प्रक्रिया अपनानी पड़ती थी, लेकिन अब अधिकांश जांच स्थानीय स्तर पर ही संभव हो सकेगी, जिससे पीड़ितों को जल्द न्याय मिलने की संभावना बढ़ेगी।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह ने इसे पुलिस आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ महीनों में जिले को साइबर थाना, क्षेत्रीय न्यायिक विज्ञान प्रयोगशाला तथा डायल-112 के लिए 16 आधुनिक ईआरवी वाहन प्राप्त हुए हैं। अब मोबाइल फॉरेंसिक यूनिट जुड़ने से पुलिस घटनास्थल पर तुरंत पहुंचकर वैज्ञानिक तरीके से जांच कर सकेगी, जिससे अपराधियों के खिलाफ मजबूत साक्ष्य एकत्रित करने और उन्हें सजा दिलाने की प्रक्रिया और अधिक प्रभावी होगी।
उप संचालक एफएसएल एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. पी.एस. भगत ने बताया कि नए आपराधिक कानूनों के तहत गंभीर अपराधों और बड़ी दुर्घटनाओं के मामलों में फॉरेंसिक टीम की तत्काल उपस्थिति आवश्यक कर दी गई है। ऐसे में यह मोबाइल यूनिट मौके पर पहुंचकर तत्काल वैज्ञानिक परीक्षण करने में सक्षम होगी।
इस हाईटेक मोबाइल फॉरेंसिक वैन में कई आधुनिक उपकरण लगाए गए हैं, जिनमें हाईटेक सीसीटीवी कैमरे, कंप्यूटर सिस्टम, सैंपल कलेक्शन लैब, फिंगरप्रिंट डेवलपमेंट किट, डीएनए सैंपल संग्रह उपकरण, हाई-इंटेंसिटी लाइट सोर्स, डिजिटल फॉरेंसिक टूल्स, बुलेट होल एवं जीएसआर जांच किट, दस्तावेजीकरण उपकरण तथा जीपीएस आधारित बॉडी वॉर्न कैमरा शामिल हैं। इन सुविधाओं की मदद से घटनास्थल पर ही महत्वपूर्ण वैज्ञानिक साक्ष्यों को सुरक्षित किया जा सकेगा।
विशेषज्ञों के अनुसार यह मोबाइल फॉरेंसिक यूनिट अपराध जांच की गति और गुणवत्ता दोनों को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी और भविष्य में आधुनिक पुलिसिंग की एक मजबूत कड़ी साबित हो सकती है।
कार्यक्रम में जिला पंचायत सीईओ अभिजीत बबन पठारे, एडीएम अपूर्व प्रियेश टोप्पो, प्रथम जिला एवं सत्र न्यायाधीश तजेश्वरी देवी देवांगन, एडिशनल एसपी अनिल कुमार सोनी, डीएसपी उन्नति ठाकुर, आरआई अमित सिंह, थाना प्रभारीगण, जनप्रतिनिधि, पुलिस विभाग के अधिकारी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
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