May 30, 2026

जमीन विवाद की खूनी साजिश का अंत : बड़े पिता ने भतीजे को तीरों से किया छलनी, न्यायालय ने सुनाई उम्रकैद की सजा

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घरघोड़ा!करीब छह वर्ष पुराने चर्चित हत्या प्रकरण में घरघोड़ा न्यायालय ने बड़ा और महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए हत्या के आरोपी कंवर सिंह राठिया को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अपर सत्र न्यायाधीश अभिषेक शर्मा की अदालत ने आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत दोषी करार देते हुए उम्रकैद एवं ₹1000 के अर्थदंड से दंडित किया है। साथ ही मृतक के आश्रितों को राहत प्रदान करने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण रायगढ़ के माध्यम से ₹1 लाख की क्षतिपूर्ति राशि प्रदान किए जाने की अनुशंसा भी की गई है।

मामले की जानकारी देते हुए शासन की ओर से पैरवी कर रहे अपर लोक अभियोजक राजेश सिंह ठाकुर ने बताया कि थाना घरघोड़ा के अपराध क्रमांक 254/2020 के तहत यह मामला दर्ज किया गया था। ग्राम कया निवासी मृतक पूरन सिंह राठिया और उसके बड़े पिता कंवर सिंह राठिया के बीच लंबे समय से जमीन को लेकर विवाद चल रहा था। इसी रंजिश ने बाद में एक खूनी घटना का रूप ले लिया।

घटना 28 अक्टूबर 2020 की दोपहर लगभग 3 बजे की है। उस दिन पूरन सिंह राठिया अपने बड़े भाई राम प्रसाद राठिया तथा गांव के संतोष राठिया और ओम राठिया के साथ खेत से धान का बंडल ट्रैक्टर-ट्रॉली में लोड कर गांव लौट रहा था। ट्रॉली में पूरन सिंह और संतोष राठिया बैठे हुए थे।

जब ट्रैक्टर मांझी डोंगरी जंगल क्षेत्र के चढ़ाई वाले हिस्से में पहुंचा और उसकी रफ्तार धीमी हुई, तभी पहले से तीर-धनुष और टांगी लेकर घात लगाए बैठे आरोपी कंवर सिंह राठिया ने अचानक हमला कर दिया। आरोपी ने सीधे पूरन सिंह को निशाना बनाते हुए एक के बाद एक तीर दाग दिए।

अचानक हुए हमले से वहां अफरा-तफरी मच गई। संतोष राठिया जान बचाने के लिए ट्रॉली से कूदकर भाग गए, जबकि अन्य लोग भी डरकर गांव की ओर भागे। लेकिन आरोपी लगातार हमला करता रहा और पूरन सिंह के गले, छाती और भुजा पर तीर मारकर उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया। अत्यधिक रक्तस्राव के कारण पूरन सिंह की मौके पर ही मौत हो गई।

घटना की सूचना मिलने के बाद थाना घरघोड़ा पुलिस ने अपराध दर्ज कर तत्कालीन विवेचना अधिकारी जितेंद्र कुमार एसैया द्वारा जांच शुरू की। जांच के दौरान महत्वपूर्ण साक्ष्य और गवाहों के बयान संकलित कर न्यायालय में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया गया।

मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने गवाहों के बयान, चिकित्सकीय रिपोर्ट एवं अन्य साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद आरोपी को दोषी पाया और आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

⚖️ इस मामले में शासन पक्ष की ओर से अपर लोक अभियोजक राजेश सिंह ठाकुर ने प्रभावी पैरवी की।