July 16, 2026

प्रेम प्रसंग बना हत्या की वजह: घरघोड़ा अपर सत्र न्यायालय ने दो आरोपियों को सुनाई उम्रकैद

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सिर कुचलकर की गई थी विशेश्वर राठिया की हत्या, पत्नी और उसके कथित प्रेमी को आजीवन कारावास; पीड़ित परिवार को ₹1 लाख क्षतिपूर्ति की अनुशंसा

घरघोड़ा/रायगढ़। लगभग छह वर्ष पुराने बहुचर्चित हत्या प्रकरण में घरघोड़ा के अपर सत्र न्यायालय ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए हत्या के दो आरोपियों टीका राम उर्फ बन सागर राठिया और सहोद्रा राठिया को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने दोनों आरोपियों पर ₹1,000-₹1,000 का अर्थदंड भी लगाया है। साथ ही मृतक के आश्रितों को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, रायगढ़ के माध्यम से ₹1 लाख क्षतिपूर्ति दिए जाने की अनुशंसा की है।

अपर सत्र न्यायाधीश अभिषेक शर्मा ने मामले की सुनवाई के बाद उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर दोनों आरोपियों को हत्या का दोषी पाया।

यह मामला 12 फरवरी 2020 का है। मृतक विशेश्वर राठिया अपने पुराने मकान में पत्नी सहोद्रा राठिया और बच्चे के साथ सोने गया था। उसी रात उसका मौसेरा भाई टीका राम उर्फ बन सागर राठिया, जो शादी का निमंत्रण देने आया था, भी वहीं रुका था। देर रात सहोद्रा राठिया ने परिजनों को बताया कि उसका पति कहीं गिर गया है। जब परिजन मौके पर पहुंचे तो विशेश्वर राठिया गंभीर रूप से घायल मिला। उसे तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मृत्यु हो गई।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत को हत्यात्मक पाए जाने के बाद पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू की। विवेचना के दौरान सामने आया कि टीका राम और सहोद्रा राठिया के बीच अवैध संबंध थे, जिसकी जानकारी मृतक को हो गई थी। इसी कारण दोनों आरोपियों ने कथित रूप से ईंट और सिल-लोढ़ा से सिर कुचलकर विशेश्वर राठिया की हत्या कर दी, ताकि उनके संबंधों का राज खुल न सके।

मामले की विवेचना तत्कालीन विवेचक निरीक्षक अमित शुक्ला ने पूरी कर न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया था। सुनवाई के दौरान सभी गवाहों के बयान, चिकित्सीय साक्ष्य और अन्य दस्तावेजी प्रमाणों के आधार पर न्यायालय ने दोनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

प्रकरण में राज्य शासन की ओर से अपर लोक अभियोजक राजेश सिंह ठाकुर ने प्रभावी पैरवी की, जिसके आधार पर अभियोजन पक्ष आरोप सिद्ध कराने में सफल रहा।

यह फैसला हत्या जैसे गंभीर अपराधों में न्यायालय की सख्त दृष्टि को दर्शाता है और यह संदेश देता है कि ऐसे जघन्य अपराधों में दोषियों को कानून के अनुसार कठोर दंड से नहीं बचाया जा सकता।