तलाईपल्ली परियोजना में मुआवजा निर्धारण पर उठे गंभीर सवाल! स्वतंत्र जांच की मांग, 15 दिन का अल्टीमेटम
रायगढ़/घरघोड़ा। एनटीपीसी तलाईपल्ली कोल माइनिंग प्रोजेक्ट में मकानों के सर्वेक्षण, क्षेत्रफल निर्धारण और मुआवजा वितरण प्रक्रिया को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। परियोजना प्रभावित ग्राम चोटीगुड़ा निवासी अबुजर खान ने कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी रायगढ़ को विस्तृत शिकायत सौंपकर आरोप लगाया है कि कुछ मामलों में सर्वेक्षण, संरचना (Structure) के मूल्यांकन तथा मुआवजा निर्धारण की प्रक्रिया में प्रथम दृष्टया संभावित अनियमितताएं प्रतीत हो रही हैं। उन्होंने पूरे प्रकरण की स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच कराने की मांग की है।
शिकायत में कहा गया है कि उपलब्ध स्थानीय जानकारियों, परियोजना क्षेत्र की वास्तविक परिस्थितियों तथा सार्वजनिक अभिलेखों के आधार पर ऐसा प्रतीत होता है कि कुछ मकानों के सर्वेक्षण एवं क्षेत्रफल निर्धारण में अभिलेखीय विवरण और वास्तविक स्थिति के बीच अंतर हो सकता है। यदि जांच में यह तथ्य सही पाए जाते हैं, तो वास्तविक पात्रता से अधिक मुआवजा स्वीकृत या वितरित होने से शासन अथवा सार्वजनिक उपक्रम को वित्तीय क्षति पहुंचने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
शिकायतकर्ता ने यह भी दावा किया है कि कुछ मकानों के वर्तमान सर्वेक्षण में पूर्व सर्वेक्षण की तुलना में क्षेत्रफल बढ़ाकर दर्शाया गया हो सकता है। इतना ही नहीं, जिन अतिरिक्त संरचनाओं के आधार पर क्षेत्रफल बढ़ाया गया, वे न तो पूर्व सर्वेक्षण के समय स्थल पर मौजूद थीं और न ही वर्तमान में उनके अस्तित्व का स्पष्ट भौतिक साक्ष्य दिखाई देता है। उनका कहना है कि सर्वेक्षण एवं मुआवजा निर्धारण के समय की वीडियोग्राफी, फोटोग्राफी, ड्रोन सर्वेक्षण, जीपीएस डेटा तथा अन्य तकनीकी अभिलेखों की जांच से इन तथ्यों का सत्यापन किया जा सकता है।
आवेदन में प्रत्येक संबंधित मकान के मूल, संशोधित एवं अंतिम सर्वेक्षण अभिलेखों का तुलनात्मक परीक्षण कराने, सक्षम तकनीकी अधिकारियों से संयुक्त भौतिक सत्यापन कराने, मापन पत्रक, स्केच, नक्शा, जीपीएस डेटा, ड्रोन सर्वेक्षण, फोटोग्राफ एवं वीडियोग्राफ सहित सभी तकनीकी दस्तावेजों की जांच करने की मांग की गई है। साथ ही मूल्यांकन समिति द्वारा अपनाए गए मानदंड, गणना पद्धति तथा स्वीकृत मुआवजा राशि की भी निष्पक्ष समीक्षा कराने का आग्रह किया गया है। शिकायतकर्ता ने यह भी मांग की है कि जांच ऐसे अधिकारी अथवा समिति से कराई जाए, जिसका सर्वेक्षण, मूल्यांकन या मुआवजा निर्धारण प्रक्रिया से पूर्व कोई प्रत्यक्ष संबंध न रहा हो।
शिकायत में प्रकरण की गंभीरता का उल्लेख करते हुए 15 दिनों के भीतर किसी वरिष्ठ अधिकारी अथवा स्वतंत्र जांच समिति द्वारा जांच प्रारंभ कराने की मांग की गई है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि निर्धारित अवधि में प्रभावी कार्रवाई शुरू नहीं होती, तो परियोजना प्रभावित ग्रामीण अपने संवैधानिक अधिकारों के तहत शांतिपूर्ण धरना, प्रदर्शन और लोकतांत्रिक आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे, जिसकी जिम्मेदारी संबंधित प्रशासन की होगी।
इस शिकायत की प्रतिलिपि पुलिस अधीक्षक रायगढ़, एसडीएम (राजस्व) घरघोड़ा, परियोजना प्रमुख एनटीपीसी तलाईपल्ली, एनटीपीसी कोल माइनिंग मुख्यालय, आयुक्त बिलासपुर संभाग, खनिज संसाधन विभाग, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग तथा आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) को भी परीक्षण एवं आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी गई है।
उल्लेखनीय है कि शिकायतकर्ता अबुजर खान स्वयं एनटीपीसी तलाईपल्ली परियोजना से प्रभावित ग्रामीण हैं और पूर्व में भी पुनर्वास, मुआवजा, सर्वेक्षण तथा परियोजना प्रभावितों के विभिन्न मुद्दों को प्रशासन के समक्ष उठाते रहे हैं। उनका कहना है कि इस शिकायत का उद्देश्य किसी व्यक्ति या संस्था पर आरोप लगाना नहीं, बल्कि तथ्यों का निष्पक्ष सत्यापन कराकर पारदर्शिता, जनहित और विधिसम्मत प्रक्रिया सुनिश्चित करना है।
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