August 31, 2026

RTI की धज्जियाँ उड़ा रहे पंचायत सचिव! 30 दिन तक दबाई जानकारी, अब प्रथम अपीलीय अधिकारी के आदेश के बाद खुलेगा जवाबों का पिटारा

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पुसल्दा और टेरम पंचायत के चार मामलों में प्रथम अपील स्वीकार, 15वें वित्त, निर्माण कार्य, MB, GST बिल और ऑडिट रिपोर्ट की जानकारी नहीं देने पर तलब हुए पंचायत सचिव

घरघोड़ा/रायगढ़।

सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए बनाए गए कानून की खुलेआम अनदेखी का मामला जनपद पंचायत घरघोड़ा अंतर्गत सामने आया है। ग्राम पंचायत पुसल्दा और ग्राम पंचायत टेरम के जनसूचना अधिकारी एवं पंचायत सचिवों ने निर्धारित 30 दिनों की वैधानिक समय-सीमा में सूचना उपलब्ध कराना उचित नहीं समझा। परिणामस्वरूप आवेदक को प्रथम अपील का सहारा लेना पड़ा। अब प्रथम अपीलीय अधिकारी के हस्तक्षेप के बाद पंचायत सचिवों को जवाब देने के लिए तलब किया गया है।

जनपद पंचायत घरघोड़ा के प्रथम अपीलीय अधिकारी सह मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने दोनों पंचायतों से जुड़े चार अलग-अलग प्रथम अपील प्रकरणों में सुनवाई निर्धारित करते हुए संबंधित पंचायत सचिवों को 29 जुलाई 2026 को सुबह 11 बजे कार्यालय में उपस्थित होने के निर्देश दिए थे । आदेश में स्पष्ट उल्लेख है कि मांगी गई समस्त जानकारी के साथ उपस्थित हों तथा यदि निर्धारित समय में सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई तो उसके कारणों का लिखित स्पष्टीकरण भी प्रस्तुत करें।

15वें वित्त आयोग के करोड़ों के खर्च पर मांगी गई थी जानकारी

आरटीआई के माध्यम से आवेदक ने वर्ष 1 अप्रैल 2023 से 31 मई 2026 तक 15वें वित्त आयोग की राशि से कराए गए विकास कार्यों और खर्च का पूरा ब्योरा मांगा था। इसमें प्रमुख रूप से—

15वें वित्त आयोग से खर्च की गई राशि का विवरण,

निर्माण कार्यों की Measurement Book (MB) की प्रमाणित प्रतियां,

सीमेंट, सरिया, रेत, बोल्डर, मशीन, पाइप, स्ट्रीट लाइट, फर्नीचर सहित खरीदी गई सामग्री के GST बिलों की प्रमाणित प्रतियां,

ऑडिट रिपोर्ट,

ग्राम पंचायत को प्राप्त राशि एवं उसके मदवार व्यय का पूरा लेखा-जोखा

जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां मांगी गई थीं।

लेकिन हैरानी की बात यह है कि सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बाद भी संबंधित पंचायत सचिवों ने कोई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई।

अब प्रथम अपील में देना होगा जवाब

सूचना नहीं मिलने के कारण आवेदक ने प्रथम अपील दायर की, जिसके बाद प्रथम अपीलीय अधिकारी ने संबंधित पंचायत सचिवों को नोटिस जारी कर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने और रिकॉर्ड प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। इससे साफ है कि प्रथम अपीलीय स्तर पर मामले को गंभीरता से लिया गया है।

RTI से खुल सकती है पंचायतों की परत-दर-परत कहानी

क्षेत्र में चर्चा है कि यदि आरटीआई के तहत मांगे गए दस्तावेज सार्वजनिक होते हैं, तो पंचायतों में हुए निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, खरीदी प्रक्रिया, भुगतान, वित्तीय प्रबंधन और सरकारी राशि के उपयोग से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं। दस्तावेजों के आधार पर विकास कार्यों की वास्तविक स्थिति और खर्च की पारदर्शिता का भी परीक्षण संभव होगा।

बड़ा सवाल— आखिर सूचना देने से परहेज क्यों?

सूचना का अधिकार अधिनियम प्रत्येक नागरिक को समयबद्ध तरीके से सूचना प्राप्त करने का कानूनी अधिकार देता है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि यदि सभी कार्य नियमानुसार हुए हैं, तो फिर मांगी गई जानकारी समय पर उपलब्ध क्यों नहीं कराई गई? क्या सूचना छिपाने की कोशिश की गई या फिर प्रशासनिक लापरवाही का मामला है? इन सवालों के जवाब अब प्रथम अपील की सुनवाई में सामने आ सकते हैं।

अब सबकी निगाहें सुनवाई और दस्तावेजों पर

जनपद पंचायत घरघोड़ा में होने वाली सुनवाई पर अब पूरे क्षेत्र की नजरें टिकी हैं। यदि पंचायत सचिव रिकॉर्ड प्रस्तुत करते हैं तो आरटीआई के जरिए पंचायतों के वित्तीय और विकास कार्यों से जुड़े कई बड़े खुलासे सामने आ सकते हैं। वहीं यदि संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया तो मामला राज्य सूचना आयोग तक पहुंच सकता है।

अब देखना यह होगा कि प्रथम अपीलीय अधिकारी के आदेश के बाद पंचायत सचिव जवाबों का पिटारा खोलते हैं या फिर सूचना छिपाने का सिलसिला आगे भी जारी रहता है।