August 31, 2026

दियागढ़ गोलीकांड में बड़ा फैसला: सगे भाई-बहन को उम्रकैद, घरघोड़ा न्यायालय ने सुनाया ऐतिहासिक निर्णय

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पुरानी रंजिश में महिला की गोली मारकर हत्या, हत्या की साजिश, सबूत मिटाने और अवैध हथियार रखने का दोषी पाया गया; पीड़ित परिवार को ₹1 लाख क्षतिपूर्ति की अनुशंसा

घरघोड़ा/रायगढ़। बहुचर्चित गढ़ (दियागढ़) गोलीकांड में घरघोड़ा स्थित अपर सत्र न्यायालय ने शनिवार को महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए गोपाल यादव और उसकी बहन लक्ष्मी यादव को दुरपती यादव की गोली मारकर हत्या के मामले में दोषी ठहराया। अपर सत्र न्यायाधीश अभिषेक शर्मा ने दोनों आरोपियों को हत्या, आपराधिक षड्यंत्र और अन्य गंभीर अपराधों में आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही विभिन्न धाराओं में अतिरिक्त सश्रम कारावास और अर्थदंड भी लगाया गया।

अपर लोक अभियोजक राजेश सिंह ठाकुर के अनुसार, घटना थाना लैलूंगा क्षेत्र के ग्राम दियागढ़ की है। घटना की रात हरिराम यादव ने पुलिस को सूचना दी कि गांव में गोली चली है। तत्कालीन थाना प्रभारी आर.एस. तिवारी पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। जांच में सामने आया कि मृतका दुरपती यादव घर के बाहर खाट पर सो रही थीं। रात करीब दो बजे गोली चलने की आवाज सुनकर परिजन बाहर निकले तो देखा कि गोपाल यादव और एक विधि के साथ संघर्षरत बालक गोली मारकर मोटरसाइकिल से फरार हो रहे थे।

प्रेम विवाह बना खूनी रंजिश की वजह

पुलिस विवेचना में सामने आया कि हरिराम यादव ने गोपाल यादव की चचेरी बहन पदमा से प्रेम विवाह किया था। इसी बात को लेकर दोनों परिवारों के बीच वर्षों से विवाद और दुश्मनी चली आ रही थी। इसी दौरान विधि के साथ संघर्षरत बालक के पिता की हत्या के मामले में हरिराम आरोपी रहा था, जिससे दोनों पक्षों की रंजिश और गहरी हो गई। मृतका दुरपती यादव और आरोपी लक्ष्मी यादव के बीच भी लगातार विवाद होता था और जान से मारने की धमकियां दी जाती थीं।

हत्या की साजिश, हथियार बरामद और सबूत मिटाने का खुलासा

जांच के दौरान पुलिस ने विधि के साथ संघर्षरत बालक को लक्ष्मी यादव के घर से पकड़ा। पूछताछ में सामने आया कि गोपाल यादव, लक्ष्मी यादव और बालक ने मिलकर हत्या की साजिश रची थी। हत्या में प्रयुक्त भरमार बंदूक को लक्ष्मी यादव ने तोड़कर छिपा दिया था। पुलिस ने गेरवानी स्थित मकान से टूटी हुई भरमार बंदूक तथा बालक से एक रिवॉल्वर बरामद किया। वहीं उड़ीसा स्थित ठिकाने से गोपाल यादव को गिरफ्तार किया गया।

हत्या, षड्यंत्र और अवैध हथियार रखने में दोष सिद्ध

विवेचना पूरी होने के बाद पुलिस ने आरोपियों के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 302, 201, 120-बी, 212, 34 तथा आर्म्स एक्ट की धारा 25 एवं 27(1) के तहत अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। विधि के साथ संघर्षरत बालक का मामला अलग से बाल न्यायालय में विचाराधीन है।

सभी साक्ष्यों और गवाहों के बयान पर विचार करने के बाद न्यायालय ने गोपाल यादव और लक्ष्मी यादव को हत्या तथा आपराधिक षड्यंत्र के अपराध में आजीवन कारावास, जबकि साक्ष्य छिपाने और अवैध हथियार रखने के अपराध में पांच-पांच वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। साथ ही गोपाल यादव पर ₹5,000 तथा लक्ष्मी यादव पर ₹4,000 का अर्थदंड भी लगाया गया।

पीड़ित परिवार को मिलेगी ₹1 लाख की सहायता

माननीय न्यायालय ने मृतका दुरपती यादव के आश्रितों को विधिक सेवा प्राधिकरण, रायगढ़ के माध्यम से ₹1,00,000 की क्षतिपूर्ति राशि प्रदान किए जाने की अनुशंसा भी की है।

इस चर्चित हत्याकांड में शासन की ओर से अपर लोक अभियोजक राजेश सिंह ठाकुर ने प्रभावी पैरवी करते हुए अभियोजन पक्ष का प्रतिनिधित्व किया। न्यायालय के इस फैसले को क्षेत्र में लंबे समय से चर्चित मामले में न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है।