August 31, 2026

खबर का हुआ असर: पत्थलगांव में खाद की कालाबाजारी पर प्रशासन का बड़ा एक्शन, ‘जय वाला जी खाद भंडार’ हुआ सील

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₹266.50 की सरकारी यूरिया ₹500 में बेचने के आरोप के बाद कार्रवाई, किसानों से बिना बिल नकद वसूली का मामला; FIR की मांग तेज

रायगढ़ । पत्थलगांव में किसानों से खाद की कालाबाजारी और मनमाने दाम वसूलने की खबर सामने आने के बाद प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए जशपुर रोड स्थित ‘जय वाला जी खाद भंडार’ को सील कर दिया। दुकान संचालक धीरज अग्रवाल पर केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित मूल्य ₹266.50 वाली 45 किलोग्राम ‘भारत यूरिया’ किसानों को ₹450 से ₹500 प्रति बोरी तक बेचने, पक्का बिल नहीं देने और केवल नकद भुगतान लेने का गंभीर आरोप है।

मामले की शिकायत कलेक्टर, कृषि विभाग, थाना प्रभारी तथा जीएसटी विभाग तक पहुंचने के बाद प्रशासन सक्रिय हुआ। जांच शुरू होते ही कृषि विभाग की टीम ने दुकान का निरीक्षण किया और प्रारंभिक कार्रवाई के तहत प्रतिष्ठान को सील कर दिया। इस कार्रवाई के बाद पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है।

सरकारी दर से लगभग दोगुनी कीमत वसूली का आरोप

शिकायत के अनुसार प्रधानमंत्री भारतीय जन उर्वरक परियोजना (PMBJP) के तहत उपलब्ध 45 किलोग्राम भारत यूरिया की अधिकतम खुदरा कीमत (MRP) ₹266.50 निर्धारित है। आरोप है कि खाद की मांग बढ़ने और उपलब्धता कम होने का फायदा उठाकर किसानों से ₹450 से ₹500 प्रति बोरी तक वसूले गए। कई किसानों ने दावा किया कि अधिक कीमत चुकाने के बावजूद उन्हें पक्का बिल तक नहीं दिया गया।

बिल मांगने पर इंकार, केवल नकद भुगतान लेने का आरोप

पीड़ित किसानों का आरोप है कि दुकानदार डिजिटल भुगतान (UPI/PhonePe) लेने से बचता था और केवल नकद राशि स्वीकार करता था। बिल मांगने पर भी पक्का बिल देने से इंकार किया जाता था। इससे टैक्स चोरी और बिना रिकॉर्ड बिक्री की आशंका भी जताई गई है। शिकायत में इस पूरे मामले की जांच जीएसटी विभाग से कराने की मांग की गई है।

कृषि विभाग ने कही सख्त कार्रवाई की बात

पत्थलगांव कृषि विभाग के अनुविभागीय अधिकारी (SDO) राकेश कुमार पैकरा ने स्पष्ट किया कि 45 किलोग्राम भारत यूरिया का निर्धारित मूल्य ₹266.50 ही है। उन्होंने कहा कि यदि जांच में अधिक कीमत वसूली, बिना बिल बिक्री या अन्य अनियमितताएं प्रमाणित होती हैं तो उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985 (FCO) के तहत उर्वरक जब्ती, लाइसेंस निलंबन अथवा निरस्तीकरण जैसी सख्त कार्रवाई की जाएगी। किसानों से वसूली गई अतिरिक्त राशि वापस कराने की प्रक्रिया भी अपनाई जाएगी।

किसानों में आक्रोश, FIR की मांग

कार्रवाई के बाद किसानों ने प्रशासन का स्वागत करते हुए कहा कि केवल दुकान सील करना पर्याप्त नहीं है। दोषियों के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा 3/7, उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985 तथा लागू अन्य कानूनी प्रावधानों के तहत आपराधिक मामला दर्ज कर एफआईआर की जानी चाहिए। किसानों ने अवैध रूप से वसूली गई राशि वापस दिलाने और पूरे नेटवर्क की जांच कराने की भी मांग की है।

प्रशासन की अपील

कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे केवल अधिकृत विक्रेताओं से ही निर्धारित शासकीय दर पर खाद खरीदें, हर खरीद पर पक्का बिल लें और कहीं भी अधिक कीमत वसूले जाने या अनियमितता मिलने पर तत्काल कृषि विभाग अथवा जिला प्रशासन को शिकायत करें।

खबर सामने आने के बाद हुई इस त्वरित कार्रवाई को क्षेत्र के किसान बड़ी सफलता मान रहे हैं। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट और दोषियों के खिलाफ होने वाली आगामी कानूनी कार्रवाई पर टिकी हुई है।