August 27, 2026

घरघोड़ा फास्ट ट्रैक कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: 2 वर्षीय मासूम से दुष्कर्म करने वाले दरिंदे को अंतिम सांस तक कारावास

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मां बयान से मुकर गई, फिर भी मेडिकल साक्ष्य और पुलिस विवेचना के दम पर दोषी को मिली उम्रकैद; पीड़िता को ₹6 लाख क्षतिपूर्ति की अनुशंसा

घरघोड़ा/। दो वर्षीय मासूम बच्ची से दुष्कर्म जैसे जघन्य अपराध में घरघोड़ा स्थित विशेष फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (POCSO/रेप) ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए आरोपी राजू महतो (पिता–विपत महतो, निवासी फत्तेपुर बिलौना, थाना औराई, जिला मुजफ्फरपुर, बिहार) को उसके शेष प्राकृतिक जीवनकाल अर्थात अंतिम सांस तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।

विशेष न्यायाधीश शहाबुद्दीन कुरैशी ने सभी साक्ष्यों का परीक्षण करते हुए आरोपी को दोषी ठहराया। न्यायालय ने विभिन्न धाराओं के तहत ₹7,000 का अर्थदंड भी लगाया तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, रायगढ़ के माध्यम से पीड़ित मासूम को ₹6 लाख क्षतिपूर्ति प्रदान किए जाने की अनुशंसा की।

घर में घुसकर मासूम से की दरिंदगी

मामले के अनुसार 22 अगस्त 2023 को थाना पूंजीपथरा क्षेत्र में पीड़िता की मां ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उसका पति प्लांट में काम करने गया हुआ था। दोपहर करीब 1 बजे आरोपी राजू महतो घर पहुंचा और आराम करने की बात कहकर कमरे में चला गया, जहां दो वर्षीय मासूम बच्ची सो रही थी।

कुछ देर बाद बच्ची के रोने की आवाज सुनकर मां कमरे की ओर पहुंची। दरवाजा अंदर से बंद था। दरवाजा खोलकर अंदर जाने पर आरोपी अर्धनग्न अवस्था में मासूम के ऊपर लेटा हुआ मिला। मां को देखते ही आरोपी मौके से फरार हो गया। बच्ची के शरीर से खून बह रहा था।

मां बयान से मुकर गई, फिर भी नहीं बच सका आरोपी

इस मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि सुनवाई के दौरान पीड़ित की मां ने न्यायालय में आरोपी के विरुद्ध अपेक्षित समर्थन नहीं किया और अपने पूर्व कथनों से मुकर गई। इसके बावजूद न्यायालय ने केवल मौखिक गवाही पर निर्भर न रहते हुए डॉक्टरी रिपोर्ट, वैज्ञानिक एवं परिस्थितिजन्य साक्ष्यों तथा विवेचना अधिकारी की सटीक एवं निष्पक्ष विवेचना को अत्यंत महत्वपूर्ण माना।

न्यायालय ने पाया कि मेडिकल साक्ष्य और विवेचना से अपराध पूरी तरह सिद्ध होता है। इसी आधार पर आरोपी को दोषी ठहराते हुए शेष प्राकृतिक जीवनकाल अर्थात अंतिम सांस तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।

पुलिस की मजबूत विवेचना बनी सजा का आधार

थाना पूंजीपथरा पुलिस ने अपराध क्रमांक 213/2023 के तहत भारतीय दंड संहिता की धारा 376, 450 तथा POCSO एक्ट की धारा 4 एवं 6 में मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार किया। विवेचना के दौरान सभी आवश्यक साक्ष्य संकलित कर न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया गया।

सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने मेडिकल रिपोर्ट और अन्य दस्तावेजी साक्ष्यों के माध्यम से अपराध को सिद्ध किया, जिसे न्यायालय ने स्वीकार करते हुए कठोर सजा सुनाई।

विशेष लोक अभियोजक ने की प्रभावी पैरवी

प्रकरण में शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक अर्चना प्रेम मिश्रा ने प्रभावी पैरवी की। न्यायालय के इस फैसले को बच्चों के विरुद्ध होने वाले जघन्य अपराधों के मामलों में मजबूत पुलिस विवेचना, वैज्ञानिक साक्ष्यों और प्रभावी अभियोजन की बड़ी सफलता माना जा रहा है। यह निर्णय स्पष्ट संदेश देता है कि यदि कोई गवाह अपने बयान से मुकर भी जाए, तब भी ठोस मेडिकल एवं वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर दोषियों को कठोरतम सजा दिलाई जा सकती है।