August 31, 2026

RTI का बड़ा खुलासा: चार ग्राम पंचायतों में सूचना रोकना पड़ा भारी, जनसूचना अधिकारी शिव प्रसाद बेहरा को 15 दिन में रिकॉर्ड देने का आदेश

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15वें वित्त आयोग के कार्यों की जानकारी नहीं देने पर प्रथम अपीलीय अधिकारी सख्त, जनपद पंचायत घरघोड़ा के चार अपील प्रकरणों में एक साथ पारित हुए आदेश

घरघोड़ा। जनपद पंचायत घरघोड़ा के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों में 15वें वित्त आयोग के तहत कराए गए विकास कार्यों की जानकारी समय-सीमा में उपलब्ध नहीं कराना संबंधित जनसूचना अधिकारी को महंगा पड़ गया। सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम, 2005 के तहत दायर चार अलग-अलग प्रथम अपीलों में प्रथम अपीलीय अधिकारी एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत घरघोड़ा ने महत्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए जनसूचना अधिकारी एवं ग्राम पंचायत सचिव शिव प्रसाद बेहरा को निर्देशित किया है कि वे 15 दिनों के भीतर मांगी गई समस्त जानकारी अभिलेखों के आधार पर उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें।

आदेश क्रमांक 1347, 1348, 1349 एवं 1350 (दिनांक 05 अगस्त 2026) के माध्यम से पारित इन आदेशों में स्पष्ट कहा गया है कि आवेदक पत्रकार शैलेश शर्मा द्वारा सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत ग्राम पंचायतों में हुए विकास कार्यों की विस्तृत जानकारी मांगी गई थी, लेकिन निर्धारित समय-सीमा में जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई, जिसके बाद प्रथम अपील दायर की गई।

इन ग्राम पंचायतों से मांगी गई थी जानकारी

प्राप्त आदेशों के अनुसार सूचना ग्राम पंचायत टेरम एवं पूसल्दा में 15वें वित्त आयोग से कराए गए कार्यों से संबंधित थी। आवेदक ने निम्न महत्वपूर्ण दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां मांगी थीं—

वर्ष 2023-24 से 2025-26 तक 15वें वित्त आयोग के अंतर्गत कराए गए सभी कार्यों का विवरण।

प्रत्येक निर्माण कार्य की Measurement Book (एम.बी.) की प्रमाणित प्रति।

निर्माण कार्यों में उपयोग किए गए सीमेंट, छड़, गिट्टी, मुरूम, रेत, पाइप, ईंट, फ्लोरिंग आदि सामग्री की जानकारी एवं जीएसटी बिलों की प्रमाणित प्रतियां।

अप्रैल 2024 से मई 2026 तक जारी भुगतान, वाउचर एवं संबंधित अभिलेख।

पंचायत में हुए सभी विकास कार्यों का संपूर्ण रिकॉर्ड।

जनसूचना अधिकारी ने समय पर नहीं दी जानकारी

सुनवाई के दौरान प्रथम अपीलीय अधिकारी ने पाया कि जनसूचना अधिकारी द्वारा सूचना का अधिकार अधिनियम में निर्धारित समयावधि के भीतर सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई। जवाब में तकनीकी कारणों का उल्लेख किया गया, लेकिन अपीलीय अधिकारी ने इसे पर्याप्त नहीं माना और स्पष्ट निर्देश जारी किए कि आवेदक को अभिलेखों का निरीक्षण कराने अथवा प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध कराने की कार्रवाई 15 दिनों के भीतर पूरी की जाए।

पारदर्शिता पर उठे सवाल

इन आदेशों के बाद पंचायतों में 15वें वित्त आयोग के तहत हुए विकास कार्यों की पारदर्शिता और वित्तीय अभिलेखों को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। विकास कार्यों से जुड़े एम.बी., जीएसटी बिल, भुगतान अभिलेख और निर्माण सामग्री के दस्तावेज सार्वजनिक होने के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि सरकारी राशि का उपयोग नियमानुसार हुआ या नहीं।

अब अगला कदम क्या होगा?

यदि जनसूचना अधिकारी शिव प्रसाद बेहरा प्रथम अपीलीय अधिकारी के आदेश का पालन करते हुए 15 दिनों के भीतर जानकारी उपलब्ध नहीं कराते हैं, तो आवेदक राज्य सूचना आयोग, रायपुर में द्वितीय अपील दायर कर सकते हैं। सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत आदेश की अवहेलना या बिना उचित कारण सूचना रोके जाने की स्थिति में आयोग संबंधित जनसूचना अधिकारी के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई पर भी विचार कर सकता है।

जनचर्चा का विषय बना मामला

एक साथ चार अपील प्रकरणों में जनसूचना अधिकारी को सूचना उपलब्ध कराने का आदेश पारित होने से मामला अब पूरे घरघोड़ा क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है। लोगों की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या निर्धारित समय सीमा में मांगी गई जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी या मामला राज्य सूचना आयोग तक पहुंचेगा, जहां इस पूरे प्रकरण की विस्तृत सुनवाई हो सकती है।