रायगढ़ में पुलिस की क्राइम मीटिंग: लंबित गंभीर अपराधों पर एएसपी अनिल सोनी का सख्त रुख, 60 दिन में सामान्य मामलों के निराकरण का अल्टीमेटम
अपराधियों पर शिकंजा कसने से लेकर अवैध प्रवासियों की जांच तक—थाना प्रभारियों को दो टूक निर्देश, लापरवाही मिली तो होगी जवाबदेही
रायगढ़। जिले में अपराध नियंत्रण को लेकर पुलिस अब और सख्त तेवर में नजर आएगी। शनिवार को पुलिस नियंत्रण कक्ष रायगढ़ में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनिल सोनी ने जिले के सभी राजपत्रित अधिकारियों, थाना एवं चौकी प्रभारियों की क्राइम मीटिंग लेकर लंबित गंभीर अपराधों, फरार आरोपियों, अवैध प्रवासियों, जुआ-सट्टा, नशे और प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की बिंदुवार समीक्षा की। एएसपी ने स्पष्ट कर दिया कि गंभीर अपराधों की विवेचना में देरी और लंबित मामलों के निराकरण में लापरवाही अब स्वीकार नहीं की जाएगी।
बैठक वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह के निर्देशानुसार आयोजित हुई। जुलाई माह में जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों में अपराध नियंत्रण और पुलिस अभियानों के तहत की गई कार्रवाई की समीक्षा करते हुए एएसपी ने थाना प्रभारियों को अपराधों के शीघ्र निराकरण और फरार आरोपियों की गिरफ्तारी पर विशेष फोकस करने के निर्देश दिए।
60 दिन में सामान्य अपराधों का निकाल, CCTNS एंट्री भी अनिवार्य
क्राइम मीटिंग में लंबित अपराधों को लेकर एएसपी अनिल सोनी ने सख्त रुख अपनाया। उन्होंने निर्देश दिए कि सामान्य अपराधों का 60 दिवस के भीतर निराकरण सुनिश्चित किया जाए। गंभीर मामलों में निर्धारित समयसीमा का विशेष ध्यान रखते हुए विवेचना में तेजी लाई जाए।
उन्होंने कहा कि अपराध के निराकरण के बाद उसकी आवश्यक प्रविष्टि CCTNS में अनिवार्य रूप से दर्ज होनी चाहिए। लंबित गंभीर अपराधों की एक-एक कर समीक्षा करते हुए उनके लंबित रहने के कारणों पर थाना प्रभारियों और विवेचकों से चर्चा की गई।
अवैध प्रवासियों की जांच में ढिलाई नहीं
अवैध प्रवासियों की जांच को लेकर भी पुलिस अधिकारियों को विशेष निर्देश दिए गए। एएसपी ने कहा कि बाहरी व्यक्तियों की पहचान और सत्यापन अपराध नियंत्रण की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है।
उन्होंने सभी थाना प्रभारियों को अभियान चलाकर होटल संचालकों और मकान मालिकों से उनके यहां ठहरने वाले व्यक्तियों तथा किरायेदारों की जानकारी ‘समाधान ऐप’ पर अपलोड कराने के निर्देश दिए। पुलिस का मानना है कि चोरी, लूट सहित अन्य अपराधों के बाद बाहरी अपराधियों के फरार होने की स्थिति में यह जानकारी जांच में अहम साबित हो सकती है।
आदतन बदमाशों पर धारा 129 BNSS का शिकंजा
संदिग्ध और आदतन अपराधियों के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई को प्रभावी बनाने पर भी जोर दिया गया। एएसपी ने आदतन बदमाशों के विरुद्ध धारा 129 BNSS के तहत कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि अपराध की पुनरावृत्ति पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।
साथ ही जुआ-सट्टा, अवैध शराब और नशे के कारोबार के खिलाफ कार्रवाई तेज करने तथा ग्रामीणों से सूचना लेकर पुलिस का सूचना तंत्र मजबूत करने के निर्देश दिए गए।
जुआ-सट्टा और नशे के कारोबार पर सीधी नजर
एएसपी ने दो टूक कहा कि किसी भी थाना क्षेत्र में जुआ-सट्टा संगठित रूप से संचालित नहीं होना चाहिए। अवैध गतिविधियों की सूचना मिलने पर तत्काल प्रभावी कार्रवाई की जाए। अवैध शराब के मामलों में ग्रामीणों का सहयोग लेकर सूचना तंत्र को और मजबूत करने के निर्देश भी दिए गए।
2025-26 के अपराध आंकड़ों की हुई तुलना
बैठक में वर्ष 2025 और 2026 के प्रथम सात माह में दर्ज अपराधों, पुलिस कार्रवाई और अपराधों के निराकरण की तुलनात्मक समीक्षा की गई। जिन थाना क्षेत्रों में प्रतिबंधात्मक कार्रवाई और लघु अधिनियम के तहत अपेक्षाकृत कम कार्रवाई पाई गई, वहां कार्रवाई बढ़ाने के निर्देश दिए गए।
लंबित मर्ग और शिकायतों की भी समीक्षा की गई तथा समयबद्ध निराकरण के निर्देश दिए गए।
महिला और बच्चों से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता के साथ तेजी
महिला एवं बच्चों से संबंधित अपराधों में संवेदनशीलता के साथ त्वरित कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। एएसपी ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में विवेचना और कार्रवाई में किसी भी स्तर पर अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए।
डिजिटल पुलिसिंग पर जोर, ई-समंस और ऑनलाइन पेशी अनिवार्य
नए आपराधिक कानूनों के अनुरूप पुलिसिंग में डिजिटल प्रक्रिया को मजबूत करने पर भी विशेष जोर दिया गया। विवेचकों को प्रशिक्षण से जुड़कर नई कानूनी प्रक्रिया की बारीकियां सीखने के निर्देश दिए गए।
CCTNS, शिकायत पोर्टल और साइबर संबंधी पोर्टल की एंट्री समय पर पूर्ण करने, ऑनलाइन पेशी का पालन करने, ई-समंस की तामिली सुनिश्चित करने तथा न्यायालयीन पेशी किसी भी स्थिति में मिस नहीं करने के निर्देश दिए गए।
लंबित मामलों वाले थानों पर रहेगी विशेष निगरानी
जिन थानों में लंबित मामलों की संख्या अधिक मिली, वहां संबंधित एसडीओपी और थाना प्रभारियों को अधीनस्थ अधिकारियों-कर्मचारियों के साथ बैठक कर लंबित मामलों के निराकरण की कार्ययोजना तैयार करने कहा गया।
एएसपी ने स्पष्ट किया कि प्रत्येक विवेचक अपने मामलों की प्रगति की नियमित समीक्षा करे। लंबित मामलों के निराकरण में लापरवाही पाए जाने पर जवाबदेही तय की जाएगी।
प्रशिक्षु उप निरीक्षकों को भी दिया गया ‘फील्ड’ मंत्र
क्राइम मीटिंग के बाद जिले में पदस्थ प्रशिक्षु उप निरीक्षकों के कार्यों की भी समीक्षा की गई। एएसपी ने प्रशिक्षु अधिकारियों को वरिष्ठ अधिकारियों और अनुभवी विवेचकों से अपराध विवेचना की बारीकियां सीखने तथा नए कानूनों और डिजिटल पुलिसिंग की प्रक्रिया को बेहतर तरीके से समझने के निर्देश दिए।
बैठक में एएसपी ट्रैफिक पुष्पेन्द्र बघेल, सीएसपी मयंक मिश्रा, डीएसपी सुशांतो बनर्जी, एसडीओपी खरसिया सतीश भार्गव, आरआई अमित सिंह सहित जिले के सभी थाना एवं चौकी प्रभारी मौजूद रहे।
स्पष्ट संदेश—अपराध लंबित रखा तो जवाबदेही तय होगी
क्राइम मीटिंग से पुलिस अधिकारियों को साफ संदेश दिया गया कि अपराध नियंत्रण के साथ लंबित मामलों का समयबद्ध निराकरण सर्वोच्च प्राथमिकता है। फरार आरोपियों की गिरफ्तारी, आदतन अपराधियों पर प्रतिबंधात्मक कार्रवाई, अवैध गतिविधियों पर शिकंजा, महिला-बाल अपराधों में त्वरित कार्रवाई और डिजिटल पुलिसिंग को मजबूत करने के जरिए जिले में अपराध नियंत्रण की रणनीति को और धार देने पर जोर दिया गया।
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