पेलमा ओपन कास्ट परियोजना पर बड़ा फैसला: प्रभावित परिवारों के हित सर्वोपरि, कलेक्टर ने SECL को दिए सख्त निर्देश
पुनर्वास से पहले ग्रामीणों की सहमति होगी जरूरी, रोजगार नीति की होगी समीक्षा, कम सर्किल रेट वाले गांवों को मिलेंगे अतिरिक्त लाभ
रायगढ़। पेलमा ओपन कास्ट कोयला परियोजना से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और पुनर्व्यवस्थापन को लेकर जिला प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी की अध्यक्षता में आयोजित जिला स्तरीय पुनर्वास एवं पुनर्व्यवस्थापन समिति की बैठक में स्पष्ट किया गया कि परियोजना प्रभावित परिवारों के हितों से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। कलेक्टर ने अधिकारियों और एसईसीएल प्रबंधन को निर्देश दिए कि पुनर्वास की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी, न्यायसंगत और शासन की नीतियों के अनुरूप हो तथा प्रत्येक पात्र परिवार को उसका वैधानिक अधिकार मिले।

बैठक में पेलमा ओपन कास्ट परियोजना के लिए अधिग्रहित पेलमा, उरबा, लालपुर, मड़वाडूमर, सकता, मिलूपारा, खर्रा, हिन्झर और जरहिडीह सहित 9 ग्रामों के प्रभावित परिवारों के पुनर्वास, रोजगार और अन्य सुविधाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों ने प्रभावित परिवारों को दिए जाने वाले लाभों की जानकारी प्रस्तुत की, जिस पर समिति ने विस्तार से समीक्षा की।
ग्रामीणों की सहमति से तय होगा पुनर्वास स्थल
कलेक्टर ने निर्देश दिए कि परियोजना प्रभावित परिवारों के पुनर्व्यवस्थापन के लिए पहले जिले में उपलब्ध उपयुक्त शासकीय भूमि का चिन्हांकन किया जाए। उन्होंने साफ कहा कि पुनर्वास स्थल का चयन केवल प्रशासनिक सुविधा के आधार पर नहीं, बल्कि संबंधित ग्रामवासियों की सहमति और राय लेकर किया जाएगा, ताकि विस्थापित परिवारों को भविष्य में किसी प्रकार की परेशानी न हो।
रोजगार नीति की होगी दोबारा समीक्षा
बैठक का सबसे महत्वपूर्ण विषय प्रभावित परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराने की प्रक्रिया रही। कलेक्टर ने कोल इंडिया लिमिटेड की पुनर्वास नीति के तहत लागू ‘डिसेंडिंग ऑर्डर कॉन्सेप्ट’ और ‘क्लबिंग कॉन्सेप्ट’ का तुलनात्मक परीक्षण कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिस व्यवस्था से प्रभावित परिवारों को अधिक लाभ मिलेगा, उसी आधार पर आगे की कार्रवाई की जाए, ताकि रोजगार वितरण अधिक न्यायसंगत और हितग्राही-केंद्रित हो सके।
कम सर्किल रेट वाले गांवों को मिलेगा अतिरिक्त पुनर्वास लाभ
बैठक में हिन्झर और जरहिडीह गांवों का मामला विशेष रूप से उठा। कलेक्टर ने कहा कि इन गांवों की भूमि का सर्किल रेट अपेक्षाकृत कम है, जिससे प्रभावित परिवारों को आर्थिक नुकसान हो सकता है। उन्होंने एसईसीएल अधिकारियों को निर्देश दिए कि ऐसे गांवों के प्रभावित परिवारों को अतिरिक्त पुनर्वास एवं पुनर्व्यवस्थापन लाभ देने की दिशा में ठोस पहल की जाए, ताकि उन्हें उचित राहत मिल सके।
सिर्फ जमीन नहीं, परिवारों का भविष्य भी सुरक्षित हो
कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने स्पष्ट किया कि पुनर्वास की प्रक्रिया केवल भूमि अधिग्रहण तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। प्रभावित परिवारों के सामाजिक, आर्थिक और आजीविका संबंधी हितों को प्राथमिकता देते हुए उन्हें सभी आवश्यक सुविधाएं और वैधानिक लाभ उपलब्ध कराना प्रशासन और एसईसीएल की संयुक्त जिम्मेदारी है।
बैठक में अपर कलेक्टर रवि राही, एसडीएम प्रवीण तिवारी, एसईसीएल के वरिष्ठ अधिकारी, जिला स्तरीय पुनर्वास एवं पुनर्व्यवस्थापन समिति के सदस्य तथा संबंधित ग्राम पंचायतों के ग्रामीण उपस्थित रहे। बैठक में पुनर्वास स्थल, रोजगार, पुनर्वास लाभ और अन्य सुविधाओं पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।
यह बैठक पेलमा ओपन कास्ट परियोजना से प्रभावित हजारों ग्रामीणों के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि प्रशासन और एसईसीएल इन निर्देशों को जमीन पर कितनी गंभीरता से लागू करते हैं।
- राष्ट्रीय खेल दिवस पर ‘युवा कनेक्ट’ कार्यक्रम, युवाओं में दिखा उत्साह - August 27, 2026
- केलो डेम के गेट खुले तो सड़कों पर पानी, रायगढ़ में पुलिस-प्रशासन अलर्ट! - August 25, 2026
- शादी का झांसा, जंगल से ओडिशा तक शोषण का आरोप; खरसिया पुलिस ने आरोपी को दबोचा - August 25, 2026








