“दिव्यांग कोटे में बड़ा खेल या रिकॉर्ड में हेरफेर?”
एक ही विभाग, एक ही विषय… लेकिन 2 साल में RTI की दो अलग-अलग सूचियां, अब उठे गंभीर सवाल
घरघोड़ा, रायगढ़।
विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय घरघोड़ा से सूचना के अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त दस्तावेजों ने दिव्यांग कोटे से हुई नियुक्तियों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि करीब दो वर्ष पहले इसी विषय पर विभाग ने 11 कर्मचारियों की सूची उपलब्ध कराई थी, जबकि अब उसी विषय पर केवल 6 कर्मचारियों की सूची दी गई है। दोनों सूचियों में भारी अंतर सामने आने से रिकॉर्ड की पारदर्शिता और विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।

पहले प्राप्त RTI उत्तर में दिव्यांग कोटे से नियुक्त 11 अधिकारियों/कर्मचारियों के नाम दर्ज थे, जबकि नवीन RTI जवाब में केवल 6 कर्मचारियों का उल्लेख किया गया है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि बाकी 5 कर्मचारियों के नाम आखिर सूची से क्यों और किस आधार पर हटाए गए?
🔍 दो साल में 11 से 6 कैसे हो गई सूची?
दोनों RTI उत्तरों की तुलना करने पर कई गंभीर प्रश्न सामने आते हैं—
क्या विभाग ने पहले गलत जानकारी दी थी?
यदि पहली सूची सही थी, तो वर्तमान सूची से 5 नाम क्यों गायब हैं?
क्या संबंधित कर्मचारी सेवानिवृत्त हुए, पदोन्नत हुए या स्थानांतरित हुए? यदि हां, तो उसका आदेश क्या है?
या फिर वर्तमान RTI में जानबूझकर अधूरी जानकारी दी गई?
क्या विभाग रिकॉर्ड में संशोधन कर अलग-अलग समय पर अलग-अलग जानकारी दे रहा है?
📄 सबसे अहम दस्तावेज फिर भी नहीं दिया गया
महिनो पूर्व,RTI आवेदन में स्पष्ट रूप से नियुक्ति के समय प्रस्तुत दिव्यांग प्रमाण-पत्र की प्रमाणित प्रति मांगी गई थी, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि संबंधित कर्मचारियों की नियुक्ति वैध दिव्यांग प्रमाण-पत्र के आधार पर हुई थी या नहीं।
लेकिन विभाग ने इस महत्वपूर्ण दस्तावेज की प्रतिलिपि उपलब्ध कराने के बजाय केवल नामों की सूची भेज दी। इससे संदेह और गहरा गया है।
अब सवाल उठ रहे हैं—
क्या विभाग के पास नियुक्ति के समय जमा दिव्यांग प्रमाण-पत्र उपलब्ध नहीं हैं?
यदि उपलब्ध हैं तो उनकी प्रमाणित प्रति देने से परहेज क्यों?
क्या अभिलेखों में कोई गड़बड़ी है?
क्या सूचना जानबूझकर रोकी जा रही है?
⚠️ रिकॉर्ड में बदलाव या जानकारी छिपाने की कोशिश?
दो अलग-अलग समय पर एक ही विषय में अलग-अलग जानकारी दिए जाने से पूरे मामले में पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लग गया है। यदि पहले 11 नाम थे और अब केवल 6 हैं, तो विभाग को इसका स्पष्ट एवं अभिलेख आधारित कारण बताना होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी कर्मचारी की सेवा समाप्त, स्थानांतरण, पदोन्नति अथवा सेवानिवृत्ति हुई है, तो उसका भी रिकॉर्ड विभाग के पास होना चाहिए और RTI में उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
⚖️ RTI कानून क्या कहता है?
सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के अनुसार जनसूचना अधिकारी की जिम्मेदारी है कि वह पूर्ण, सही एवं अभिलेख आधारित सूचना उपलब्ध कराए। यदि बिना वैधानिक कारण के सूचना रोकी जाती है या भ्रामक अथवा अधूरी जानकारी दी जाती है, तो संबंधित अधिकारी के विरुद्ध धारा 20 के तहत कार्रवाई का प्रावधान है।
🚨 दिव्यांग कोटे में फर्जीवाड़े की आशंका, जांच की मांग तेज
विरोधाभासी सूचियों और दिव्यांग प्रमाण-पत्रों की प्रतियां उपलब्ध नहीं कराए जाने के बाद क्षेत्र में चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि अभी तक किसी प्रकार के फर्जीवाड़े की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन उपलब्ध दस्तावेज कई सवाल जरूर खड़े कर रहे हैं। ऐसे में पूरे मामले की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच की मांग जोर पकड़ने लगी है।
🗣️ उठ रही हैं ये प्रमुख मांगें
वर्ष 2024 और वर्तमान RTI में दी गई दोनों सूचियों का मिलान कराया जाए।
सूची से गायब 5 कर्मचारियों के संबंध में अभिलेख आधारित कारण सार्वजनिक किए जाएं।
नियुक्ति के समय प्रस्तुत सभी दिव्यांग प्रमाण-पत्रों का सत्यापन कराया जाए।
दिव्यांग आरक्षण रोस्टर एवं नियुक्ति प्रक्रिया की जांच हो।
अधूरी या विरोधाभासी सूचना देने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
📌 अब आगे क्या?
सूत्रों के अनुसार, मामले को लेकर प्रथम अपील, राज्य सूचना आयोग तथा आवश्यकता पड़ने पर सक्षम जांच एजेंसियों के समक्ष भी शिकायत की तैयारी की जा रही है। यदि जांच में रिकॉर्ड में हेरफेर, सूचना छिपाने या नियुक्तियों में अनियमितता सामने आती है, तो यह मामला केवल RTI तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दिव्यांग आरक्षण के दुरुपयोग और संभावित बड़े फर्जीवाड़े के रूप में भी सामने आ सकता है।
नोट: उपलब्ध RTI दस्तावेजों से यह स्पष्ट है कि दोनों अवधियों में सूचियों में अंतर है। हालांकि केवल इन दस्तावेजों के आधार पर फर्जीवाड़ा सिद्ध नहीं होता। अंतिम निष्कर्ष सक्षम जांच और आधिकारिक अभिलेखों के सत्यापन के बाद ही निकाला जा सकता है।
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