“तिरपाल के भरोसे तहसील! पहली बारिश में बह गए विकास के दावे, जलभराव ने खोली सरकारी व्यवस्था की पोल”
घरघोड़ा, रायगढ़।पहली ही बारिश ने घरघोड़ा तहसील कार्यालय की बदहाली को सबके सामने ला दिया। जिस कार्यालय से पूरे क्षेत्र की राजस्व व्यवस्था संचालित होती है, वही कार्यालय आज जलभराव और जर्जर भवन की समस्या से जूझता नजर आ रहा है। परिसर में चारों ओर पानी भर जाने से पूरा कार्यालय तालाब जैसा दिखाई दे रहा है, जबकि छत से टपकते पानी के बीच अधिकारी और कर्मचारी तिरपाल लगाकर सरकारी काम निपटाने को मजबूर हैं।

तहसील कार्यालय पहुंचने वाले ग्रामीण, किसान, महिलाएं, बुजुर्ग और छात्र पानी से होकर कार्यालय तक पहुंच रहे हैं। कई स्थानों पर फिसलन होने से दुर्घटना का खतरा भी बना हुआ है। वहीं कार्यालय के भीतर रखे महत्वपूर्ण सरकारी रिकॉर्ड और दस्तावेज भी बारिश के पानी से प्रभावित होने की आशंका में हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि तहसील जैसा महत्वपूर्ण सरकारी कार्यालय ही सुरक्षित नहीं है, तो आम जनता को बेहतर प्रशासन और मूलभूत सुविधाओं का भरोसा कैसे दिलाया जाएगा? वर्षों से भवन की जर्जर स्थिति और जलभराव की समस्या बनी हुई है, लेकिन अब तक न तो भवन का समुचित जीर्णोद्धार कराया गया और न ही स्थायी जल निकासी व्यवस्था बनाई गई।
जनता पूछ रही है…
क्या हर साल बारिश में तहसील कार्यालय तालाब ही बनता रहेगा?
क्या किसी बड़े हादसे के बाद ही प्रशासन जागेगा?
क्या करोड़ों के विकास कार्यों में तहसील भवन की मरम्मत के लिए बजट नहीं है?
आखिर कब तक कर्मचारी तिरपाल के नीचे बैठकर सरकारी काम करेंगे?
जनता की मांग
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि तहसील भवन का तत्काल सर्वे कराकर नए भवन का निर्माण अथवा व्यापक जीर्णोद्धार कराया जाए। साथ ही परिसर में पक्की जल निकासी व्यवस्था, सुरक्षित आवागमन और सरकारी अभिलेखों की सुरक्षा के लिए आवश्यक व्यवस्था तत्काल सुनिश्चित की जाए।
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