“जहरीला पानी पीने को मजबूर बिजारी के ग्रामीण! खदान ब्लास्टिंग से भूजल हुआ दूषित, बूंद-बूंद पानी के लिए मचा हाहाकार”
ग्रामीणों का आरोप – खदान की अंधाधुंध ब्लास्टिंग से सरकारी और निजी बोर हुए बेकार, कई घरों में निकल रहा मटमैला पानी, शिकायत करने पर धमकाने का भी आरोप।

घरघोड़ा – भीषण गर्मी के बीच घरघोड़ा विकासखंड के ग्राम बिजारी में पेयजल संकट अब विकराल रूप ले चुका है। ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र में संचालित खदान में लगातार की जा रही भारी ब्लास्टिंग के कारण भूजल स्तर बुरी तरह प्रभावित हुआ है। परिणामस्वरूप सरकारी और निजी बोरवेल या तो सूख चुके हैं या उनमें से गंदा, बदबूदार और मटमैला पानी निकल रहा है। तस्वीरों में बाल्टी में भरा पानी किसी नाले या गड्ढे के पानी जैसा दिखाई दे रहा है, जिसे पीना तो दूर, घरेलू उपयोग के लिए भी असुरक्षित माना जा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि जिस पानी को पीकर परिवार अपनी प्यास बुझाने को मजबूर हैं, वह स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन चुका है। महिलाओं और बच्चों को सुबह-शाम पानी के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है। कई घरों में पानी के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है, जबकि कुछ बोरवेल केवल दो से पांच मिनट तक ही पानी देते हैं और फिर बंद हो जाते हैं।
ग्रामीण रामेश्वर साहू ने जिला कलेक्टर रायगढ़ को लिखित शिकायत सौंपकर आरोप लगाया है कि खदान प्रबंधन द्वारा नियमों की अनदेखी कर लगातार ब्लास्टिंग की जा रही है, जिससे गांव का भूजल स्तर तेजी से नीचे चला गया है। उनका कहना है कि सरकारी पेयजल व्यवस्था भी प्रभावित हो गई है और गांव के लोग पीने के साफ पानी के लिए तरस रहे हैं।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि जब ग्रामीणों ने खदान प्रबंधन से पेयजल की वैकल्पिक व्यवस्था की मांग की, तो उन्हें राहत देने के बजाय धमकाया गया। ग्रामीणों ने संबंधित अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, ब्लास्टिंग पर नियंत्रण लगाने और गांव में तत्काल स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने की मांग की है।
ग्रामीणों का सवाल है कि जब उद्योगों और खदानों से करोड़ों रुपये का कारोबार हो रहा है, तो प्रभावित गांवों को स्वच्छ पेयजल जैसी बुनियादी सुविधा क्यों नहीं मिल रही? आखिर कब तक ग्रामीण जहरीले और गंदे पानी से अपनी प्यास बुझाने को मजबूर रहेंगे?
अब सभी की नजर जिला प्रशासन पर टिकी है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो पेयजल संकट के साथ-साथ गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ, तो वे बड़े जनआंदोलन के लिए मजबूर होंगे।
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