September 24, 2026

महा-खुलासा : जशपुर का ‘खसरा-तंत्र’ – एक अजब शख्सियत, जिसकी बदलती जाति ने हिलाया दिल्ली का दरबार!…

0
IMG-20260113-WA0002.jpg

जशपुर। जिले के पत्थलगांव में आदिवासी जमीनों की ‘जादूगरी’ का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है जिसे सुनकर आप दंग रह जाएंगे। यह कहानी एक ऐसे ‘हुनरमंद’ व्यक्तित्व की है जो न केवल सरकारी दस्तावेजों में अपनी जाति बदल लेता है, बल्कि आदिवासियों के लिए बने अभेद्य कानूनों को भी ‘कागज की रद्दी’ साबित कर देता है। स्वतंत्र पत्रकार की शिकायत के बाद अब इस पूरे खेल की गूंज प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) तक जा पहुंची है।

‘जातीय गिरगिट’ : सुबह गोंड, शाम को उरांव? – दस्तावेजों के मायाजाल में सबसे मजेदार और डरावना पहलू नरेश कुमार सिदार (पिता अजब सिंह) की ‘जातीय कलाबाजी’ है।

  • ​ग्राम पालीडीह के रिकॉर्ड में उन्हें ‘गोंड’ जनजाति का बताया गया है।
  • ​लेकिन जैसे ही खसरा नंबर 513/85/ख की फाइल खुलती है, नरेश जी का ‘हृदय परिवर्तन’ हो जाता है और वे रातों-रात ‘उरांव’ बन जाते हैं।
  • ​सवाल यह है कि क्या यह महज प्रशासनिक चूक है या आदिवासी जमीन के नियमों को ‘बाईपास’ करने के लिए रचा गया कोई सोची-समझी स्क्रिप्ट?

डायवर्जन का ‘जादू’ और कंक्रीट के नोट! – ​नरेश कुमार जी को शायद खेती से ज्यादा कंक्रीट के जंगलों से प्यार है।

  • ​पत्थलगांव स्थित उनकी जमीनों की लंबी सूची (खसरा नं. 513/15/क/5, 513/24/क आदि) अब धान की जगह ‘व्यापार’ उगलने को तैयार हैं।
  • ​दस्तावेजों में इन जमीनों को धड़ल्ले से “वाणिज्यिक/परिवर्तित” (Commercial) दर्ज किया गया है।
  • ​आखिर आदिवासियों की जमीन के डायवर्जन के सख्त नियम नरेश जी के मामले में ‘छुट्टी’ पर क्यों थे?

HDFC बैंक का ‘वेलेंटाइन डे’ प्रेम! – ​आम आदमी को एक लोन के लिए नानी याद दिला देने वाले बैंक, नरेश जी पर नोटों की बारिश कर रहे हैं।

  • ​28 अगस्त 2025 का दिन शायद कोई महा-मुहूर्त था, क्योंकि इसी एक दिन में नरेश जी ने अपनी अधिकांश कमर्शियल जमीनें HDFC BANK, रायगढ़ में बंधक (Mortgage) रख दीं।
  • ​करोड़ों के इस वित्तीय लेनदेन और ‘मॉर्टगेज खेल’ ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

पर्दे के पीछे का ‘मास्टरमाइंड’ आयुष अग्रवाल? – ​इस खेल का एक और बड़ा मोहरा आयुष अग्रवाल बताया जा रहा है।

  • ​सामने आई एक ‘सीक्रेट ऑडियो कॉल’ से साफ जाहिर होता है कि आयुष न केवल जमीनों के रेट तय कर रहा है, बल्कि रायपुर की बड़ी पार्टियों को जशपुर की प्राइम लोकेशन पर 5-10 एकड़ जमीन दिलाने की सेटिंग कर रहा है।
  • ​यह ऑडियो उस ‘सिंडिकेट’ की ओर इशारा करता है जो जशपुर के भविष्य को ही कमीशन पर चढ़ा चुका है।

पीएमओ (PMO) का एक्शन : रडार पर ‘जशपुर का माफिया’ –  पत्रकार की शिकायत (पंजीकरण संख्या: PMOPG/D/2026/0007354) पर प्रधानमंत्री कार्यालय ने संज्ञान ले लिया है।

  • ​मामला फिलहाल छत्तीसगढ़ शासन के लोक शिकायत निवारण विभाग में ‘Under Process’ है।
  • ​मुख्य मांग है कि आदिवासियों की जमीन हड़पने के इस ‘अजब-गजब’ गठजोड़ पर FIR हो और वित्तीय जांच की जाए।

अब देखना यह है कि प्रशासन इस ‘खसरा-तंत्र’ के जादूगरों पर कार्रवाई करता है या फाइलें ठंडे बस्ते में डाल दी जाती हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *