September 23, 2026

“गरीबों की थाली में ‘खंडा’ का खेल? घरघोड़ा में घटिया राशन चावल पर भड़का जनाक्रोश”

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“टूटे दानों से भरे चावल वितरण पर उठे सवाल, हितग्राहियों बोले — क्या सिर्फ कागज़ों में होती है गुणवत्ता जांच?”

📍 घरघोड़ा | रायगढ़

घरघोड़ा क्षेत्र में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत वितरित किए जा रहे राशन चावल की गुणवत्ता को लेकर लोगों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। क्षेत्र की कई उचित मूल्य दुकानों से मिलने वाले चावल को लेकर हितग्राहियों ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। आरोप है कि लोगों को “खंडा मिश्रण” यानी अत्यधिक टूटे और निम्न गुणवत्ता वाले चावल वितरित किए जा रहे हैं, जो खाने योग्य मानकों पर खरे नहीं उतर रहे।

ग्रामीण अंचलों से लेकर नगर क्षेत्र तक राशन लेने पहुंचे उपभोक्ताओं का कहना है कि चावल में टूटे दानों की मात्रा असामान्य रूप से अधिक है। कई हितग्राहियों ने नाराजगी जाहिर करते हुए इसे “पशु आहार जैसी गुणवत्ता” का बताया। लोगों का कहना है कि ऐसे चावल से भोजन बनाने में दिक्कत हो रही है और कई परिवार मजबूरी में राशन लेने के बावजूद उसका उपयोग नहीं कर पा रहे हैं।

इस पूरे मामले ने नागरिक आपूर्ति निगम तथा संबंधित विभागीय अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि वितरण से पहले गुणवत्ता की निष्पक्ष और प्रभावी जांच हुई होती, तो इतनी खराब गुणवत्ता का चावल उचित मूल्य दुकानों तक पहुंच ही नहीं पाता।

विश्वस्त सूत्रों के अनुसार, चावल की गुणवत्ता परीक्षण, भंडारण और परिवहन प्रक्रिया को लेकर भी अंदरखाने कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं। सूत्रों का दावा है कि निगरानी व्यवस्था में लापरवाही अथवा परीक्षण प्रक्रिया में ढिलाई के कारण निम्न स्तर का चावल सीधे हितग्राहियों तक पहुंच गया। हालांकि इस मामले में विभागीय अधिकारियों की ओर से अब तक कोई स्पष्ट आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

क्षेत्र में यह चर्चा भी तेज है कि कहीं न कहीं लापरवाही या मिलीभगत के कारण ही गरीबों को निम्न गुणवत्ता का राशन उपलब्ध कराया जा रहा है। स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, चावल के सैंपल की गुणवत्ता परीक्षण रिपोर्ट सार्वजनिक करने तथा दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

लोगों का कहना है कि गरीब और जरूरतमंद परिवारों को मिलने वाले राशन की गुणवत्ता से समझौता किसी भी हालत में स्वीकार नहीं किया जा सकता। फिलहाल घरघोड़ा सहित आसपास के क्षेत्रों में इस मुद्दे को लेकर असंतोष का माहौल बना हुआ है और अब सबकी नजर प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई है।

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