September 24, 2026

डिजिटल इंडिया के पोर्टल पर झूठ का पुलिंदा? PMO से छत्तीसगढ़ के जनसंपर्क विभाग पहुंची शिकायत हुई ‘गायब’? पोर्टल कह रहा ‘जांच जारी’, विभाग कह रहा ‘शिकायत मिली ही नहीं’!…

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नवा रायपुर : जब सत्ता के शीर्ष ‘प्रधानमंत्री कार्यालय’ (PMO) से भेजी गई शिकायतें भी रायपुर के दफ्तरों की लालफीताशाही में गुम हो जाएं, तो समझिए कि ‘सुशासन’ का दावा केवल कागजी है। यह मामला एक पत्रकार की फरियाद का है, जिसे छत्तीसगढ़ के जनसंपर्क विभाग ने एक अजीबोगरीब विरोधाभास में उलझाकर रख दिया है।

प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग (CPGRAMS) का पोर्टल जहां एक ओर पारदर्शिता के बड़े-बड़े दावे करता है, वहीं छत्तीसगढ़ के जनसंपर्क विभाग (Public Relations CG) की कार्यशैली ने इन दावों की पोल खोल दी है। मामला शिकायत (पंजीकरण संख्या: PMOPG/D/2025/0229404) से जुड़ा है, जो अब सरकारी विभागों के बीच की खींचतान और लापरवाही का शिकार होता दिख रहा है।
पोर्टल का झूठ या विभाग की मक्कारी?
केंद्र सरकार के पोर्टल पर इस शिकायत की स्थिति स्पष्ट रूप से ‘Under Process’ (प्रक्रियाधीन) दिखाई दे रही है। पोर्टल के रिकॉर्ड के अनुसार, यह शिकायत छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग के पास कार्रवाई के लिए लंबित है। लेकिन जब RTI (सूचना के अधिकार) के तहत जवाब मांगा गया, तो विभाग के जनसूचना अधिकारी नितिन शर्मा ने हाथ खड़े कर दिए। विभाग का लिखित जवाब है कि— “शिकायत पत्र संचालनालय में अप्राप्त है।”

*अधिकारियों को चुभते सवाल:*

* डाक कहां गई? यदि PMO (प्रधानमंत्री कार्यालय) से शिकायत अग्रेषित हुई और पोर्टल पर अपडेट है, तो क्या वह बीच रास्ते में ही गायब हो गई?
* कैसी ‘डिजिटल’ प्रगति? एक तरफ हम पेपरलेस ऑफिस की बात करते हैं, दूसरी तरफ विभाग फाइल न मिलने का बहाना बनाकर आम आदमी को ‘निरंक’ (शून्य) जवाब थमा रहा है।
* कौन दे रहा है धोखा? या तो CPGRAMS का डेटा गलत है, या फिर छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग जानबूझकर शिकायत को दबाकर बैठा है।

*जनता की चक्की में पिसता आवेदक :*आवेदक अब प्रथम अपीलीय अधिकारी श्री संजीव तिवारी के दरवाजे खटखटाने को मजबूर है। क्या यह अधिकारियों की वह पुरानी ‘टालू नीति’ है, जिससे वे अपनी जवाबदेही से बचना चाहते हैं?

यह मामला केवल एक व्यक्ति की शिकायत का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की साख का है। यदि PMO से भेजी गई शिकायतें भी रायपुर के दफ्तरों में आकर ‘खो’ जाती हैं, तो आम आदमी की सुरक्षा और न्याय की उम्मीद किससे की जाए?

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