September 24, 2026

पत्थलगांव लैंड स्कैम : RTI से खुला भ्रष्टाचार का पिटारा; कलेक्टर की रडार पर ‘जादुई’ डायवर्जन और करोड़ों का बैंक खेल!…

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पत्थलगांव।छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में आदिवासी जमीनों को हड़पने और उनके दस्तावेजों के साथ ‘जादूगरी’ करने का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने बेनामी संपत्ति के नियमों और सत्ता के गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। स्वतंत्र पत्रकार की शिकायत और RTI से निकले दस्तावेजों ने नरेश कुमार सिदार और आयुष अग्रवाल के उस गठजोड़ की पोल खोल दी है, जो शासन के कड़े नियमों को ठेंगा दिखाकर आदिवासियों की जमीन को ‘इन्वेस्टमेंट’ का जरिया बना चुके हैं।

*RTI का ‘ब्रह्मास्त्र’ : बेनामी खेल की ओर इशारा -* हाल ही में प्राप्त RTI जानकारी (आवेदन क्रमांक: 220260312004476) ने इस मामले में निर्णायक मोड़ ला दिया है।

* कलेक्टर को फाइल : जन सूचना अधिकारी के जवाब (23/03/2026) के अनुसार, इस पूरे प्रकरण की फाइल अब कलेक्टर जशपुर की रडार पर है।
* बेनामी लेनदेन की आशंका : जिस तरह से एक ही दिन (28 अगस्त 2025) में करोड़ों की ‘कमर्शियल’ जमीनें HDFC Bank में बंधक रखी गई हैं, वह सीधे तौर पर बेनामी संपत्ति और मनी लॉन्ड्रिंग के शक को गहरा करता है।

*’जातीय गिरगिट’ का खेल : सुबह गोंड, शाम को उरांव! -* दस्तावेजों के मायाजाल में सबसे चौंकाने वाला पहलू नरेश कुमार सिदार (पिता अजब सिंह) की ‘जातीय कलाबाजी’ है:

* पालीडीह का सच : राजस्व रिकॉर्ड में उसे ‘गोंड’ जनजाति का बताया गया है।
* पत्थलगांव का ‘जादू’ : लेकिन खसरा नंबर 513/85/ख की फाइल खुलते ही वह अचानक ‘उरांव’ बन जाता है।
* सवाल : क्या यह केवल प्रशासनिक चूक है या आदिवासी जमीन के नियमों को ‘बाईपास’ कर बेनामी साम्राज्य खड़ा करने की सोची-समझी स्क्रिप्ट?

*डायवर्जन का ‘शौक’ और कंक्रीट के नोट -* नरेश कुमार को शायद खेती से ज्यादा कंक्रीट के जंगलों से प्यार है :

* धान की जगह व्यापार : पत्थलगांव स्थित उनकी जमीनों (खसरा नं. 513/15/क/5, 513/24/क आदि) को धड़ल्ले से वाणिज्यिक/परिवर्तित (Commercial) दर्ज कराया गया है。
* सिस्टम ‘छुट्टी’ पर : आदिवासियों की जमीन के डायवर्जन के सख्त नियम इस मामले में पूरी तरह नदारद दिखे, जिससे भ्रष्टाचार की बू आती है。

*पर्दे के पीछे का ‘मास्टरमाइंड’ :* आयुष अग्रवाल और ऑडियो बम – इस खेल का एक और बड़ा मोहरा आयुष अग्रवाल बताया जा रहा है। सामने आई एक ‘सीक्रेट ऑडियो कॉल’ से साफ जाहिर होता है कि आयुष न केवल जमीनों के रेट तय कर रहा है, बल्कि रायपुर की बड़ी पार्टियों के लिए जशपुर की प्राइम लोकेशन पर 5-10 एकड़ जमीन की सेटिंग कर रहा है। यह ऑडियो उस ‘सिंडिकेट’ की ओर इशारा करता है जो बेनामी संपत्तियों के जरिए जशपुर के भविष्य का सौदा कर रहा है।

*PMO की रडार पर ‘जशपुर का लैंड माफिया’ -* पत्रकार की शिकायत (पंजीकरण संख्या: PMOPG/D/2026/0007354) पर प्रधानमंत्री कार्यालय ने कड़ा संज्ञान लिया है।

* मुख्य मांग : आदिवासियों की जमीन हड़पने के इस ‘अजब-गजब’ गठजोड़ पर FIR हो और वित्तीय जांच (Financial Investigation) के जरिए बेनामी संपत्तियों को जब्त किया जाए।
* वर्तमान स्थिति : मामला फिलहाल छत्तीसगढ़ शासन के लोक शिकायत निवारण विभाग में ‘Under Process’ है।

जशपुर के इस ‘खसरा-तंत्र’ के जादूगरों पर अब कानून का शिकंजा कसना शुरू हो गया है। देखना यह है कि प्रशासन बेनामी संपत्ति अधिनियम के तहत कितनी कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करता है।

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