September 23, 2026

“पहले पुनर्वास या पहले बुलडोजर?” — बरौद में SECL के खिलाफ फूटा जनाक्रोश, ग्रामीणों ने दी दो टूक चेतावनी

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🚨 “जब तक गांव का आखिरी व्यक्ति मौजूद है, तब तक स्कूल-अस्पताल को हाथ लगाना बर्दाश्त नहीं”

📍 घरघोड़ा | रायगढ़

रायगढ़ जिले के घरघोड़ा विकासखंड अंतर्गत ग्राम बरौद में एसईसीएल की खुली खदान परियोजना को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि पूर्ण पुनर्वास से पहले ही गांव की सार्वजनिक सुविधाओं पर बुलडोजर चलाने की तैयारी की जा रही है, जिसे लेकर पूरे गांव में जबरदस्त आक्रोश है।

ग्रामीणों का कहना है कि “पहले सम्मानजनक पुनर्वास, फिर खदान विस्तार” — यही उनकी अंतिम और स्पष्ट मांग है। उनका आरोप है कि कोयला उत्पादन बढ़ाने की जल्दबाजी में एसईसीएल प्रबंधन गांव के अस्तित्व से जुड़ी मूलभूत सुविधाओं को समाप्त करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है।

🚨 ग्रामसभा का स्पष्ट फैसला : 70% सहमति के बिना नहीं हटेगा कोई भवन

17 अप्रैल 2026 को आयोजित ग्रामसभा में पारित प्रस्ताव क्रमांक-06 में ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि जब तक गांव का अंतिम परिवार भी वर्तमान स्थान पर निवास कर रहा है, तब तक स्कूल, अस्पताल, पंचायत भवन, आंगनबाड़ी, राशन दुकान सहित किसी भी सार्वजनिक सुविधा को नहीं हटाया जाएगा।

ग्रामसभा ने यह भी साफ कर दिया कि 70 प्रतिशत ग्रामीणों की लिखित सहमति के बिना किसी भी शासकीय भवन या सार्वजनिक संपत्ति को क्षति पहुंचाना अस्वीकार्य होगा।

🚨 कलेक्टर और SDM को सौंपा ज्ञापन, प्रशासन से मांगा हस्तक्षेप

25 मई 2026 को ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर रायगढ़ एवं एसडीएम घरघोड़ा को ज्ञापन सौंपकर आरोप लगाया कि एसईसीएल प्रबंधन खदान विस्तार के लिए गांव की आवश्यक सुविधाओं को हटाने का दबाव बना रहा है।

ज्ञापन में पूर्व माध्यमिक एवं प्राथमिक शाला, आंगनबाड़ी केंद्र, अस्पताल भवन, पंचायत कार्यालय, राजीव गांधी भवन, उचित मूल्य दुकान, सांस्कृतिक मंच, सड़कें एवं चौक-चौराहों जैसी सार्वजनिक परिसंपत्तियों को सुरक्षित रखने की मांग की गई है।

🚨 “बच्चों की पढ़ाई और मरीजों का इलाज नहीं होने देंगे प्रभावित”

प्रभावित परिवारों ने चेतावनी दी है कि जब तक प्रत्येक परिवार का विधिवत पुनर्वास नहीं हो जाता, तब तक बिजली, पानी, सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं को खत्म करना उनके संवैधानिक और मानवीय अधिकारों का सीधा हनन होगा।

ग्रामीणों का कहना है कि खदान विस्तार के नाम पर बच्चों की शिक्षा और मरीजों के उपचार से समझौता नहीं किया जा सकता।

🚨 मानवाधिकार आयोग तक पहुंची शिकायत

मामले की गंभीरता को देखते हुए ग्रामीणों ने शिकायत की प्रतियां राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय, खान सुरक्षा महानिदेशालय (धनबाद) तथा जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों को भी भेजी हैं।

ग्रामीणों की मांग है कि एसईसीएल की कथित मनमानी पर तत्काल रोक लगाई जाए और पहले पुनर्वास प्रक्रिया को पूरी तरह सम्पन्न कराया जाए।

🔥 ग्रामीणों का ऐलान

“जब तक गांव का आखिरी व्यक्ति यहां रह रहा है, तब तक स्कूल, अस्पताल, पंचायत भवन और अन्य जनसुविधाओं को कोई हाथ नहीं लगा सकता। पहले पुनर्वास, फिर खदान विस्तार।”

बरौद के ग्रामीणों की यह एकजुटता अब केवल एक गांव का मुद्दा नहीं रह गई है, बल्कि यह विकास बनाम विस्थापन की बहस का बड़ा केंद्र बनती जा रही है। आने वाले दिनों में यह संघर्ष जिले की सबसे बड़ी जनसरोकार की लड़ाइयों में से एक साबित हो सकता है।

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