September 23, 2026

RTI कानून की खुली अवहेलना? समयसीमा में जानकारी नहीं, फिर निजी नंबर से व्हाट्सऐप पर भेजे गए जवाब!

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विकासखंड शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल, अधूरी और भ्रामक जानकारी देने के आरोप

रायगढ़/घरघोड़ा।सूचना के अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी को लेकर विकासखंड शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। आरोप है कि विभाग ने निर्धारित समयसीमा के भीतर जानकारी उपलब्ध नहीं कराई और बाद में विभागीय बाबू द्वारा निजी मोबाइल नंबर से संपर्क कर व्हाट्सऐप के जरिए अधूरी जानकारी भेजने का प्रयास किया गया।

मामला अब केवल सूचना देने में देरी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि विभाग पर आधी-अधूरी, विरोधाभासी और भ्रामक जानकारी देने के भी गंभीर आरोप लग रहे हैं। इससे विभाग की पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल खड़े होने लगे हैं।

सूत्रों के मुताबिक आवेदक ने विकासखंड शिक्षा विभाग से कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर जानकारी मांगी थी। लेकिन विभाग की ओर से कुछ सवालों के जवाब ही नहीं दिए गए, जबकि कई बिंदुओं पर गोलमोल जवाब देकर केवल औपचारिकता निभाई गई। आरोप यह भी है कि मांगी गई महत्वपूर्ण दस्तावेजी जानकारी को जानबूझकर दबाने का प्रयास किया गया।

“सरकारी प्रक्रिया छोड़ निजी व्हाट्सऐप का सहारा क्यों?”

सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब RTI कानून के तहत सूचना उपलब्ध कराने की स्पष्ट प्रक्रिया निर्धारित है, तो फिर विभागीय कर्मचारी द्वारा निजी मोबाइल नंबर से संपर्क कर व्हाट्सऐप पर जानकारी भेजने की जरूरत आखिर क्यों पड़ी?

क्या विभाग आधिकारिक रिकॉर्ड और दस्तावेजी जवाबदेही से बचना चाहता था?
क्या सूचना को विभागीय अभिलेखों में दर्ज होने से रोकने की कोशिश की गई?
या फिर जानबूझकर RTI प्रक्रिया को कमजोर कर मामले को अनौपचारिक तरीके से निपटाने का प्रयास किया गया?

कानूनी जानकारों का कहना है कि सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी विभागीय लेटरहेड, अधिकृत हस्ताक्षर और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उपलब्ध कराई जानी चाहिए। निजी नंबर और व्हाट्सऐप के जरिए सूचना भेजना प्रशासनिक पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

📑 RTI एक्ट की खुलेआम अनदेखी?

RTI अधिनियम 2005 के अनुसार सामान्य मामलों में 30 दिनों के भीतर सूचना देना अनिवार्य है। लेकिन यहां समयसीमा गुजरने के बाद भी पूर्ण जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। इतना ही नहीं, आवेदक का आरोप है कि जो जानकारी दी गई उसमें कई तथ्य विरोधाभासी और भ्रामक हैं।

बताया जा रहा है कि कुछ सवालों के जवाब जानबूझकर टाल दिए गए, जबकि कुछ दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां अब तक उपलब्ध नहीं कराई गईं। इससे पूरे मामले में लीपापोती और तथ्यों को छुपाने की आशंका गहरा गई है।

🔍 अब उठ रहे बड़े सवाल

आखिर निर्धारित समयसीमा में जानकारी क्यों नहीं दी गई?

अधूरी और भ्रामक जानकारी देकर क्या छुपाने का प्रयास किया गया?

निजी मोबाइल नंबर और व्हाट्सऐप का इस्तेमाल किसके निर्देश पर किया गया?

क्या विभाग RTI कानून की आधिकारिक प्रक्रिया से बचना चाहता था?

क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होगी?

क्या सूचना देने में जानबूझकर देरी कर मामले को दबाने की कोशिश की गई?

⚠️ प्रथम अपील और शिकायत की तैयारी

मामले को लेकर अब उच्च अधिकारियों से शिकायत और प्रथम अपील की तैयारी की जा रही है। यदि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच होती है, तो विकासखंड शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली से जुड़े कई और चौंकाने वाले खुलासे सामने आ सकते हैं।

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