September 23, 2026

शिक्षा विभाग में बड़ा एक्शन या वर्षों की व्यवस्था पर सवाल? गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों के संलग्नीकरण पर चला बुलडोजर

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एक सप्ताह में मूल पदस्थापना पर लौटने का अल्टीमेटम, नहीं तो रुकेगा जुलाई का वेतन… आखिर अब क्यों जागा विभाग?

रायपुर। छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा विभाग ने गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों के संलग्नीकरण (अटैचमेंट) पर कड़ा प्रहार करते हुए सभी संलग्नीकरण तत्काल प्रभाव से समाप्त करने का आदेश जारी कर दिया है। साथ ही स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि सभी कर्मचारी एक सप्ताह के भीतर अपनी मूल पदस्थ संस्था में लौटकर ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करें, अन्यथा जुलाई 2026 का वेतन रोक दिया जाएगा और विभागीय कार्रवाई भी होगी।

लेकिन इस आदेश के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि संलग्नीकरण व्यवस्था नियमों के अनुरूप नहीं थी, तो आखिर वर्षों तक यह चलती कैसे रही?

लोक शिक्षण संचालनालय ने अपने आदेश में स्वीकार किया है कि जून और जुलाई में कई बार निर्देश जारी किए गए, फिर भी अनेक कर्मचारी न तो मूल कार्यालय पहुंचे और न ही ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कर रहे थे। ऐसे में प्रश्न यह भी है कि पहले जारी निर्देशों का पालन क्यों नहीं कराया गया और जिम्मेदार अधिकारियों ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की?

अब उठ रहे हैं कई बड़े सवाल…

▶ क्या जिले और विकासखंड स्तर पर अधिकारियों की जानकारी के बिना वर्षों तक संलग्नीकरण चलता रहा?

▶ यदि कर्मचारी मूल पदस्थापना पर नहीं थे, तो उनकी कार्य उपस्थिति का सत्यापन कौन करता रहा?

▶ जिन कार्यालयों में कर्मचारी संलग्न थे, वहां उन्हें किसके आदेश से रखा गया? क्या सभी संलग्नीकरण वैध आदेशों के आधार पर थे?

▶ यदि कर्मचारी ऑनलाइन उपस्थिति नहीं लगा रहे थे, तो अब तक उनका वेतन किस आधार पर जारी होता रहा?

▶ क्या अब उन अधिकारियों की भी जिम्मेदारी तय होगी, जिन्होंने ऐसे मामलों पर निगरानी नहीं रखी?

आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि शासन के निर्देशों का पालन न करना छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के विपरीत है। इसके बावजूद यदि कर्मचारी लंबे समय से मूल कार्यालयों में उपस्थित नहीं थे, तो यह केवल कर्मचारियों की ही नहीं, बल्कि निगरानी व्यवस्था की भी परीक्षा है।

अब लोक शिक्षण संचालनालय ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को एक सप्ताह के भीतर आदेश का पालन सुनिश्चित कर प्रतिवेदन भेजने के निर्देश दिए हैं। इससे संकेत मिलते हैं कि इस बार विभाग केवल चेतावनी तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि वास्तविक अमल चाहता है।

क्या अब खुलेगा वर्षों पुराने संलग्नीकरण का पूरा रिकॉर्ड?

शिक्षा विभाग के इस आदेश ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है। यदि सभी कर्मचारियों को मूल पदस्थापना पर लौटना है, तो यह भी सामने आ सकता है कि कौन-कौन कर्मचारी वर्षों से संलग्न थे, किन अधिकारियों ने उन्हें संलग्न रखा और किन कार्यालयों में वास्तविक पद रिक्त होने के बावजूद काम प्रभावित होता रहा।

अब निगाहें इस बात पर हैं कि क्या विभाग केवल कर्मचारियों पर कार्रवाई करेगा, या फिर उन अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होगी, जिनकी निगरानी में यह व्यवस्था वर्षों तक चलती रही।

फिलहाल इतना तय है कि शिक्षा विभाग का यह आदेश केवल संलग्नीकरण समाप्त करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे प्रशासनिक तंत्र की जवाबदेही और कार्यप्रणाली पर भी बड़े सवाल खड़े कर रहा है।

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