September 23, 2026

19 साल से अटकी मुआवजा दरों पर फूटा किसानों का गुस्सा, मुख्यमंत्री से लगाई न्याय की गुहार

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पोरड़ा, पोरड़ी और कुर्मीभौना के 1,100 से अधिक प्रभावित परिवार बोले— 2007 की दरों पर नहीं चलेगा 2026 का भू-अर्जन, बाजार भाव के अनुसार मिले मुआवजा।

घरघोड़ा/रायगढ़। रायगढ़ जिले के घरघोड़ा क्षेत्र के पोरड़ा, पोरड़ी और कुर्मीभौना गांवों के भू-अर्जन प्रभावित किसानों ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर वर्षों पुरानी मुआवजा नीति में संशोधन की मांग तेज कर दी है। किसानों का कहना है कि वर्ष 2007 में तय की गई ₹6 लाख, ₹8 लाख और ₹10 लाख प्रति एकड़ की न्यूनतम मुआवजा दरें आज के बाजार मूल्य के मुकाबले बेहद कम हैं, जिससे प्रभावित परिवारों के साथ अन्याय हो रहा है।

ज्ञापन में बताया गया है कि वर्तमान में क्षेत्र में कृषि भूमि की बाजार कीमत 20 से 25 लाख रुपये प्रति एकड़ से भी अधिक है, जबकि पुनर्वास नीति की पुरानी दरें लागू होने से किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

दस्तावेज के अनुसार कुर्मीभौना (299 परिवार), पोरड़ी (130 परिवार) और पोरड़ा (700 परिवार) सहित लगभग 1,129 परिवार सीधे तौर पर प्रभावित हैं। किसानों का कहना है कि महंगाई, बढ़ती जमीन की कीमत और आजीविका के संकट को देखते हुए मुआवजा दरों का तत्काल पुनरीक्षण आवश्यक है।

ज्ञापन में किसानों ने मांग की है कि:

वर्ष 2007 की जगह 2026 के बाजार मूल्य के आधार पर नई मुआवजा दरें तय की जाएं।

पंजीकृत विक्रय पत्र, गाइडलाइन मूल्य और महंगाई सूचकांक को आधार बनाया जाए।

भू-अर्जन के साथ पेड़-पौधों का उचित मुआवजा भी दिया जाए।

भविष्य में मुआवजा दरों के नियमित पुनरीक्षण की व्यवस्था लागू की जाए।

किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि वर्षों से लंबित इस मांग पर गंभीरता से निर्णय नहीं लिया गया तो प्रभावित परिवारों में व्यापक असंतोष बढ़ सकता है। ज्ञापन पर बड़ी संख्या में ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों के हस्ताक्षर भी किए गए हैं।

प्रभावित ग्रामीणों ने एक स्वर मे कहा…

“2007 की कीमत पर 2026 में जमीन नहीं देंगे”— भू-अर्जन प्रभावित किसानों ने सरकार से कहा, बाजार भाव के अनुसार मिले न्यायपूर्ण मुआवजा।

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